स्वस्थ समाज और न्याय की अनूठी मिसाल,शहडोल न्यायलयीन परिसर और जेलों में गूंजा योग का मंत्र, प्रशासनिक मुस्तैदी की चौतरफा सराहना
Junaid Khan - शहडोल। मानवता को निरोग और अनुशासित जीवन की राह दिखाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर आज शहडोल संभाग ने न्याय और सुधार की एक ऐतिहासिक इबारत लिखी है। मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के दिशा-निर्देशों के अनुरूप और माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री काशीनाथ सिंह महोदय के कुशल मार्गदर्शन में शहडोल जिला न्यायालय के भव्य नवीन भवन परिसर सहित पूरे जिले में योग का अभूतपूर्व शंखनाद हुआ। इस गरिमामयी आयोजन में प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय श्री शशि भूषण शर्मा, जिला न्यायाधीश श्री के पी सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती श्वेता परते तिवारी, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती प्रीति सिंह बघेल, श्रीमती नूतन रावते, श्री अरविंद मीणा, श्रीमती अभिसारिका महोने, प्रशिक्षु न्यायाधीश सुश्री मीमांसा दुबे और जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री देवेंद्र सिंह परस्ते सहित योग प्रशिक्षकों, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के प्रबुद्ध अधिवक्ताओं और समस्त न्यायालयीन व कार्यालयीन स्टाफ ने पूर्ण समर्पण के साथ योगासन किए। कार्यक्रम के समापन पर प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय श्री शशि भूषण शर्मा ने योग को आधुनिक जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए उपस्थित जनसमुदाय को मानसिक शांति और शारीरिक दृढ़ता के लिए एक अनुशासित जीवन शैली अपनाने का संकल्प दिलाया। सुधार गृहों में बदली आबोहवा: उच्च न्यायालय की अनूठी पहल से बंदियों के जीवन में नई सुबह, तहसील स्तर पर भी प्रशासनिक समन्वय रहा बेमिसाल यह केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर और जेल की कालकोठरी में बंद कैदियों के पुनर्वास की दिशा में न्याय विभाग का एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ है। शहडोल जिला न्यायालय के साथ-साथ तहसील न्यायालय ब्यौहारी, बुढार एवं जयसिंहनगर, तथा जिला जेल शहडोल, उपजेल बुढार व ब्यौहारी में एक साथ, एक ही समय पर इस विशेष योग कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन प्रशासन की उत्कृष्ट प्रबंधन क्षमता और संवेदनशीलता को दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में प्रदेश की समस्त जेलों में 15 जून से चल रहे इस विशेष योग सप्ताह का वर्चुअल शुभारंभ माननीय प्रभारी मुख्य न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति श्रीमान विवेक रूसिया सर द्वारा केंद्रीय जेल जबलपुर के सभागार से किया गया था। जेल की चहारदीवारी के भीतर बंदियों को अवसाद से उबारने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए न्यायपालिका और स्थानीय प्रशासन की यह दीर्घकालिक योजना वास्तव में वंदनीय है। एक ही दिन में इतने व्यापक स्तर पर बिना किसी बाधा के गरिमापूर्ण आयोजन संपन्न कराकर शहडोल न्यायिक प्रशासन ने प्रदेश स्तर पर अपनी मुस्तैदी, दूरदर्शिता और जनकल्याणकारी सोच का लोहा मनवाया है, जिसकी आम जनता से लेकर प्रबुद्ध वर्ग तक चौतरफा सराहना की जा रही है।
