भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने के बाद भी नई पदस्थापना पर नहीं किया ज्वाइन
Junaid Khan - शहडोल। अनूपपुर नगरपालिका परिषद धनपुरी से नगर परिषद बनगवां-राजनगर स्थानांतरित की गईं मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) पूजा बुनकर एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। एक ओर उन्होंने अपने पिता की गंभीर बीमारी का हवाला देकर 15 दिन का अवकाश लिया, वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट जबलपुर में उनकी मौजूदगी की चर्चा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानांतरण आदेश जारी होने के सात दिन बाद भी उन्होंने नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की विभागीय जांच में पूजा बुनकर के विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं एवं नियम विरुद्ध खरीदी के आरोप प्रमाणित पाए गए हैं।
जांच में क्या-क्या हुआ प्रमाणित
हाईमास्ट खरीदी में लाखों का नुकसान जांच प्रतिवेदन के अनुसार सिवनी नगरपालिका में पदस्थ रहते हुए 9 मीटर हाईमास्ट एवं 12 मीटर हाईमास्ट लाइटों की खरीदी निर्धारित दरों से काफी अधिक कीमत पर की गई।
9 मीटर हाईमास्ट खरीदी में लगभग ₹3.20 लाख की आर्थिक क्षति। 12 मीटर हाईमास्ट खरीदी में लगभग ₹2.60 लाख की आर्थिक क्षति।
एल.ई.डी. लाइट खरीदी में अनियमितता
140 नग LED लाइटों की खरीदी में निर्धारित दरों की तुलना में अधिक भुगतान किया गया, जिससे लगभग ₹1.36 लाख की अतिरिक्त आर्थिक हानि होना पाया गया।
कुल आर्थिक नुकसान
जांच अधिकारी की रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि उक्त तीनों मामलों में नगरपालिका को कुल लगभग ₹7.16 लाख की आर्थिक क्षति हुई, जिसके लिए तत्कालीन सीएमओ पूजा बुनकर को उत्तरदायी माना गया।
खरीदी प्रक्रियाओं में निर्धारित तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृतियों का पालन नहीं पाया गया। UADD-ISSR-2021 में उपलब्ध दरों की तुलना किए बिना अधिक दरों पर सामग्री खरीदे जाने के तथ्य सामने आए। जांच अधिकारी ने पूजा बुनकर को उक्त मामलों में उत्तरदायी माना।
विभागीय जांच के बाद आरोप प्रमाणित पाए गए।
विभाग ने क्या दी सजा
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, भोपाल द्वारा जारी आदेश में पूजा बुनकर के विरुद्ध आरोप प्रमाणित माने गए।
उनके द्वारा किए गए कृत्य को कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही एवं उदासीनता माना गया।
शासन के प्रति निष्ठा संदिग्ध होने की टिप्पणी भी दर्ज की गई।
दो वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने का दंड दिया गया।
आर्थिक क्षति की अनुपातिक राशि वेतन से वसूलने के निर्देश भी दिए गए। अब उठ रहे हैं ये सवाल। यदि पिता की बीमारी इतनी गंभीर थी कि अवकाश लेना आवश्यक था, तो हाईकोर्ट में उपस्थिति कैसे दर्ज हुई.
स्थानांतरण आदेश के बाद निर्धारित अवधि में नवीन पदस्थापना पर ज्वाइन क्यों नहीं किया गया। क्या स्थानांतरण रुकवाने के लिए कानूनी प्रयास किए जा रहे हैं.भ्रष्टाचार संबंधी आरोप सिद्ध होने के बाद भी जिम्मेदारी तय कर पूरी वसूली कब होगी। भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध, विभागीय दंड भी मिला... फिर भी ज्वाइनिंग से दूरी और हाईकोर्ट की दौड़ ने पूरे मामले को नए विवाद में ला खड़ा किया है।
