नगरपालिका में 'अपनों' पर मेहरबानी,07 टेंडरों में चहेतों को रेवड़ी बांटने का बड़ा खेल, फाइलों में पासवर्ड लगा छिपाए जा रहे कारनामे

इंजीनियर और बाबू की जुगलबंदी से बाहरी ठेकेदार आउट,जेडी के कड़े रुख से मचा हड़कंप,सीएमओ ने साधी चुप्पी 


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल नगरपालिका में जनता की गाढ़ी कमाई और विकास कार्यों के बजट को अपनों के बीच बंदरबांट करने का एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर मामला सामने आया है। शुचिता और पारदर्शिता का दावा करने वाले नगर पालिका प्रशासन की नाक के नीचे चहेते ठेकेदारों को उपकृत करने के लिए नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि संभागीय संयुक्त संचालक (जेडी) को सीधे दखल देना पड़ा है। जेडी ने इस पूरे टेंडर घोटाले और गंभीर लापरवाही की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए शहडोल नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) निशांत सिंह ठाकुर को एक कड़ा पत्र जारी किया है। जेडी ने सीधे तौर पर प्रशासन को चुनौती देते हुए महज 2 दिनों के भीतर पूरी जानकारी और स्पष्टीकरण तलब किया है। जेडी के इस औचक हंटर से नगरपालिका के भीतर मलाईदार कुर्सियों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों और बाबुओं के खेमे में हड़कंप मच गया है।

इंजीनियर-बाबू का सिंडिकेट, बीओक्यू फाइल में पासवर्ड डालकर लॉक किया सच 

यह कोई सामान्य प्रशासनिक ढर्रा नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया टेंडर का 'इनसाइडर गेम' है। शिकायतकर्ता सुशील वर्मा द्वारा लगाए गए आरोपों ने नगरपालिका के भीतर चल रहे संगठित भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। आरोप है कि नगरपालिका के रसूखदार इंजीनियर और बाबू आपस में मिलकर एक मजबूत सिंडिकेट चला रहे हैं। ये नुमाइंदे नगर पालिका के कुछ पर्दे के पीछे बैठे रसूखदार आकाओं के इशारे पर काम कर रहे हैं। हद तो तब हो गई जब टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह से हाईजैक करने के लिए बीओक्यू (बिल ऑफ क्वांटिटीज) की सरकारी फाइल में पासवर्ड लगा दिया गया और उसे लॉक कर दिया गया ताकि कोई दूसरा इसमें सेंध न लगा सके और सच बाहर न आए। इस तकनीकी हेरफेर के जरिए बाहरी और बेहतर काम करने वाले ईमानदार ठेकेदारों को साजिशन रेस से बाहर कर दिया गया ताकि केवल और केवल चहेते और मनपसंद ठेकेदारों को ही मलाईदार काम सौंपकर अपनी मनमर्जी चलाई जा सके।

तारीख दर तारीख हुआ खेल,घिरने के बाद फोन उठाने से कतरा रहे सीएमओ

भ्रष्टाचार के इस पूरे खेल की टाइमिंग भी कई बड़े सवाल खड़े करती है। जिन संदिग्ध टेंडरों को लेकर जेडी ने कड़ा रुख अपनाया है, उनमें 24 जून के दो टेंडर, 25 जून के दो टेंडर, 26 जून के दो टेंडर और 27 जून का एक टेंडर शामिल है। यानी लगातार चार दिनों के भीतर बैक-टू-बैक 7 टेंडरों में इस बड़ी हेराफेरी को अंजाम दिया गया। एक तरफ जेडी द्वारा 13 जुलाई को लिखे गए पत्र के बाद नगरपालिका की साख दांव पर लगी है, वहीं दूसरी तरफ इस पूरे मामले में जवाबदेह शीर्ष अधिकारी यानी सीएमओ निशांत सिंह ठाकुर का रवैया भी बेहद संदेहास्पद बना हुआ है। जब इस गंभीर भ्रष्टाचार और जेडी के नोटिस पर सीएमओ का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया और फोन लगाया गया, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। शीर्ष अधिकारी की यह चुप्पी इस बात का साफ संकेत है कि प्रशासन के पास इस खुली लापरवाही और चहेतों को उपकृत करने वाले आरोपों का कोई ठोस जवाब नहीं है। अब देखना यह है कि 2 दिन की समयसीमा में क्या सच सामने आता है या फिर इसे भी ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जाएगी।

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