मौत के मुहाने पर संभाग मुख्यालय,बिना फायर NOC धड़ल्ले से चल रहे शहर के होटल-लॉज

नपा के पास 2 मंजिल से ऊपर आग बुझाने का इंतजाम तक नहीं

बड़ा सवाल,टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने 8 मंजिला इमारतों को दे दी हरी झंडी, लेकिन संकरी गलियों में फंसी नपा की व्यवस्था; क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन? 


Junaid Khan - शहडोल। संभाग मुख्यालय शाहडोल में जनता की जान को हथेली पर रखकर होटलों और लॉज का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर स्थानीय प्रशासन और नगरपालिका पूरी तरह मेहरबान नजर आ रहे हैं। बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला सच यह है कि पूरे शहर में महज 4 होटलों के पास ही वैध फायर एनओसी (Fire NOC) है, जबकि बाकी के अधिकांश होटल और लॉज बिना किसी पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात तो यह है कि जो नगरपालिका इन पर कार्रवाई करने का दावा करती है, खुद उसके पास दो मंजिल से ऊपर की इमारतों में लगी आग पर काबू पाने के पर्याप्त संसाधन ही मौजूद नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि शहर के किसी बहुमंजिला होटल में कोई अप्रिय घटना घटती है, तो मासूम नागरिकों की जान का जिम्मेदार कौन होगा?

कागजी नोटिसों के खेल में उलझा तंत्र,संकरी गलियां बनीं 'डेथ ट्रैप

प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा शहर में आठ-आठ मंजिला भवनों के निर्माण की धड़ाधड़ अनुमतियां तो बांट दी गईं, लेकिन जमीनी हकीकत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। स्टेशन रोड पर स्थित एक होटल के सामने की सड़क महज पांच फीट चौड़ी है, जहां दमकल वाहन तो दूर, एक सामान्य गाड़ी का समय पर निकलना भी नामुमकिन है। इन संकरी गलियों में चल रहे होटल सीधे तौर पर बड़ी दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। नगरपालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने पिछले साल ही एक बड़ी आगजनी की घटना के बाद ढिंढोरा पीटा था कि शहर के लिए 18 मीटर क्षमता का आधुनिक हाइड्रोलिक वाहन मंगाया जाएगा, लेकिन साल बीत जाने के बाद भी यह घोषणा सिर्फ फाइलों में दफन है। वर्तमान में नपा के पास सिर्फ 12 मीटर की पुरानी हाइड्रोलिक मशीन है, जिससे केवल दो मंजिला भवनों तक ही राहत पहुंचाई जा सकती है। साफ है कि जिम्मेदार अधिकारी टीपीसीपी की अनुमतियां जारी करते समय सुरक्षा उपायों को लेकर पूरी तरह आंखें मूंदे रहे।

जिम्मेदारों के गोलमोल जवाब, जनता में गहराता आक्रोश 

इस पूरे मामले में जब मुख्य नगरपालिका अधिकारी निशांत सिंह ठाकुर से बात की गई, तो उनका वही पुराना रटा-रटाया प्रशासनिक राग सामने आया। सीएमओ का कहना है कि "सभी होटलों को नोटिस जारी किए गए हैं और फायर एनओसी लेना अनिवार्य किया जा रहा है। आकस्मिक आगजनी से निपटने के लिए अन्य इंतजाम भी किए जा रहे हैं।" लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर यह नोटिस-नोटिस का खेल कब तक चलेगा? जब पूर्व में 5 अगस्त 2025 को भारती प्रेस भवन में हुई आगजनी के दौरान नपा की दमकल प्रबंधन की घोर लापरवाही और लाचारी उजागर हो चुकी है, जिसके बाद रिलायंस और अन्य निजी कंपनियों से मदद मांगनी पड़ी थी, तब भी जिम्मेदार अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद क्यों नहीं खुली? कागजों पर चल रही यह प्रशासनिक खानापूर्ति और टालमटोल की नीति किसी दिन शहर को भारी पड़ने वाली है।

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