अंधेर नगरी-चौपट व्यवस्था,बेखौफ लुटेरों ने संभागीय मुख्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को सरेआम दी चुनौती,गश्त के दावों के बीच बंद कमरों में लकीर पीट रही जिला पुलिस
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिले के भीतर इन दिनों कानून का इकबाल पूरी तरह जमींदोज हो चुका है और आम जनता बदमाशों के रहमों-करम पर जीने को मजबूर है। खाकी की सुस्ती और लचर गश्त व्यवस्था का सबसे सनसनीखेज नजारा तब देखने को मिला, जब रविवार दोपहर करीब 12 बजे शहर के सबसे व्यस्ततम इलाके जयस्तंभ चौक के समीप बाणगंगा बाईपास तिराहे पर बाइक सवार दो नकाबपोश बदमाशों ने दिनदहाड़े एक महिला के गले पर झपट्टा मारकर सोने की चेन लूट ली। ब्यौहारी निवासी पीड़िता सुकृति गुप्ता अपने पति अशोक कुमार गुप्ता के साथ बस से उतरकर जयस्तंभ चौक स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती अपने बीमार रिश्तेदार को देखने पैदल जा रही थीं, तभी बिना नंबर की बाइक पर आए शातिर लुटेरों ने इस वारदात को अंजाम दिया। झपट्टे के कारण सोने की चेन टूटकर आधी महिला के दुपट्टे में फंस गई, जबकि आधा हिस्सा लेकर लुटेरे हवा में गायब हो गए। व्यस्त चौराहे पर दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने शहर के सुरक्षा चक्र की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। हालांकि कोतवाली पुलिस हमेशा की तरह 'अज्ञात' के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज खंगालने का पारंपरिक राग अलाप रही है, लेकिन इस दुस्साहस ने साबित कर दिया है कि अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है।
ग्रामीण अंचलों में भी चोरों का तांडव,गोहपारू में दो घरों को बनाया निशाना, जेवर-नकदी सहित कीमती बर्तन तक समेट ले गए शातिर अपराधी
शहडोल की शहरी सीमा ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाके भी अब सुरक्षित नहीं बचे हैं। जिला पुलिस की निष्क्रियता का फायदा उठाते हुए चोरों ने गोहपारू थाना क्षेत्र के दो अलग-अलग गांवों में धावा बोलकर पुलिसिया गश्त की कलई खोल दी। पहली वारदात मोहतरा गांव की है, जहां रामकली प्रजापति नाम की महिला अपने किसी रिश्तेदार के घर खैरा गई हुई थी। सूने मकान का फायदा उठाकर चोरों ने दोनों कमरों और अलमारी के ताले तोड़ डाले और अंदर रखे जेवरात व मोटी नकदी साफ कर दी। वहीं दूसरी वारदात खत्रौधी गांव में घटित हुई, जहां 4 जुलाई की रात करीब 1.30 बजे लल्लू यादव के घर के मुख्य गेट का ताला तोड़कर रसोई और कमरों में घुस आए चोरों ने नकदी सहित कीमती बर्तनों पर हाथ साफ कर दिया। दोनों ही मामलों में पीड़ितों को सुबह तब पता चला जब ताले टूटे और सामान बिखरा मिला। गोहपारू पुलिस ने भी महज औपचारिकता निभाते हुए अज्ञात चोरों के खिलाफ मर्ग कायम कर विवेचना शुरू कर दी है। एक ही रात में दो अलग-अलग जगहों पर हुई इन चोरियों से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और लोग अब अपनी सुरक्षा के लिए खुद रात-जगा करने को मजबूर हैं।
दो महीने बीतने पर भी जयसिंहनगर की 4 लाख की सनसनीखेज लूट अनसुलझी, नाकामियों को छिपाने के लिए खाकी के पास सिर्फ 'दावों का पुलिंदा'
जिले के भीतर कानून व्यवस्था की इस बदहाली का सबसे बड़ा कारण पुलिस की ढीली जांच और मामलों का खुलासा न हो पाना है। इसका जीता-जागता उदाहरण जयसिंहनगर थाना क्षेत्र में मई 2026 में दिनदहाड़े हुई 4 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट का मामला है। एक बेखौफ गिरोह ने बैंक से रुपये निकालकर आ रहे एक व्यापारी की कार का शीशा तोड़कर डैशबोर्ड में रखा नोटों से भरा बैग उड़ा लिया था। इस वारदात को बीते पूरे दो महीने (60 दिन) से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन जयसिंहनगर पुलिस के हाथ आज भी पूरी तरह खाली हैं। वारदात के वक्त भी पुलिस ने बैंक और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और जल्द ही आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने का भारी-भरकम दावा किया था, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक न तो किसी आरोपी की पहचान हो सकी, न गिरफ्तारी हुई और न ही व्यापारी की गाढ़ी कमाई बरामद हो पाई। पुलिस की इस घोर नाकामी ने अपराधियों के हौसलों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, जिसका नतीजा आज जयस्तंभ चौक और गोहपारू की वारदातों के रूप में सामने आ रहा है। व्यापारी वर्ग और आम जनता के बीच गहराता असुरक्षा का यह माहौल अब सीधे तौर पर जिले के आला पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है।
