सहकारी साख व्यवस्था को खुली चुनौती,नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच वसूली राशि बैंक खाते में जमा करने के बजाय खुद हजम कर गए जनार्दन प्रसाद शुक्ल; ऑडिट जांच में खुला करप्शन का काला चिट्ठा, अब पुलिस खंगाल रही रिकॉर्ड
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिले की सहकारी समितियों में मासूम और सीधे-साधे किसानों के खून-पसीने की कमाई को डकारने का एक और सनसनीखेज और बेहद शर्मनाक मामला उजागर हुआ है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति (बी-पैक्स) देवरी लफदा के तत्कालीन और अब सेवानिवृत्त हो चुके प्रबंधक जनार्दन प्रसाद शुक्ल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए संस्था की साख और गरीब किसानों के भरोसे की सरेआम धज्जियां उड़ा दी हैं। मामले का चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब समिति के अभिलेखों और वित्तीय खातों की गहन जांच व ऑडिट किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपी प्रबंधक ने नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच क्षेत्र के 26 पीड़ित किसानों से ऋण वसूली के रूप में कुल 5 लाख 20 हजार रुपये की नकद राशि प्राप्त की थी। नियमतः इस पूरी रकम को समिति के अधिकृत बैंक खाते में जमा किया जाना था, लेकिन रसूख और बेखौफ प्रशासनिक ढुलमुलपन का फायदा उठाते हुए तत्कालीन प्रबंधक ने इस सरकारी और किसानों की राशि को बैंक में डालने के बजाय अपने पास रखकर इसकी खुली हेराफेरी कर दी। अन्नदाताओं के साथ हुई इस महाधोखाधड़ी के सामने आने के बाद वर्तमान समिति प्रबंधक राजेंद्र सेन की लिखित शिकायत पर आखिरकार गोहपारू पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रबंधक जनार्दन प्रसाद शुक्ल के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में लिया है। सेवानिवृत्ति की आड़ में रची गई थी करप्शन की 'स्क्रिप्ट'; बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की जांच में जुट गई पुलिस, क्या सलाखों के पीछे जाएंगे आरोपी? इस पूरे मामले में सहकारिता विभाग के भीतर बैठे कुछ अन्य बड़े चेहरों की मिलीभगत और सुस्त मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि आरोपी जनार्दन प्रसाद शुक्ल बीते 28 फरवरी 2026 को ही समिति से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिससे साफ झलकता है कि रिटायरमेंट से ठीक पहले इस पूरी हेराफेरी के खेल को अंजाम देकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की शातिर साजिश रची गई थी। यदि समय रहते समिति के अभिलेखों का बारीकी से मिलान न होता, तो शायद यह राशि हमेशा के लिए दब जाती। गोहपारू पुलिस के अनुसार, इस पूरे घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए मामले से जुड़े सभी अहम दस्तावेजों, बैंक लेनदेन के ब्योरों और पीड़ित 26 किसानों के भुगतान संबंधी रिकॉर्ड्स को जब्त कर उनकी गहन तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुख्ता प्रमाणों के आधार पर आगे की कड़ी वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब देखना यह है कि अन्नदाताओं के हक पर डाका डालने वाले इस सफेदपोश चेहरे पर प्रशासन कितनी जल्दी शिकंजा कसता है या फिर यह मामला भी केवल कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाएगा?
