राजस्थान की हैवानियत पर शहडोल में फूटा आक्रोश,AIMIM ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

दरिंदों को फांसी और पीड़िताओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानून की मांग


Junaid Khan - शहडोल। राजस्थान में एक मासूम 13 वर्षीय बालिका के साथ घटित हुए जघन्य और अमानवीय अपराध ने न केवल इंसानियत को शर्मसार किया है, बल्कि देश भर के जागरूक नागरिकों और संगठनों के सब्र का बांध भी तोड़ दिया है। इस वीभत्स कृत्य के विरोध में और देश में महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक ढुलमुल रवैये को सीधी चुनौती देते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) शहडोल इकाई ने एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अख्तियार किया है। संगठन के पदाधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम शहडोल जिला कलेक्टर को एक तीखा ज्ञापन सौंपकर देश की लचर सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते हौसलों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर इतनी तत्परता और मुखरता से आवाज उठाने के लिए ज्ञापन देने वाले संगठन और जागरूक समाज की चौतरफा सराहना हो रही है, जिन्होंने सोते हुए सिस्टम को जगाने का काम किया है।

दरिंदों को सीधे फांसी की सजा की मांग,नामी-गिरामी चेहरों ने एक सुर में कहा-अब बर्दाश्त नहीं होगी प्रशासनिक लापरवाही

ज्ञापन के माध्यम से यह साफ चेतावनी दी गई है कि ऐसे घिनौने अपराधियों के लिए समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। कानून की मर्यादा और उसकी ताकत का अहसास कराते हुए मांग की गई है कि इस जघन्य कृत्य के दोषियों को ऐसी कठोरतम फांसी की सजा दी जाए, जो देश में एक नजीर (मिसाल) बन सके, ताकि भविष्य में कोई भी हैवान ऐसा कृत्य करने से पहले कांप उठे। इस ऐतिहासिक आक्रोश प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद यासीन खान (मेम्बरशिप ड्राइव इनचार्ज, मध्य प्रदेश) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर एनी खान, फरहत खान, फिजा खान, तानिया खान, फलक खान, जोया खान, सानिया खान, कामरून निशा, सिमरन खान, साजिदा खान, निखत खान, अतिका खान सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक शामिल हुए। इन सभी ने एक सुर में कहा कि जब तक सरकारें और जांच एजेंसियां अपनी सुस्ती छोड़कर ऐसे मामलों में सख्त रुख नहीं अपनातीं, तब तक अपराधियों का मनोबल टूट पाना नामुमकिन है।

जांच के नाम पर खानापूर्ति बंद करे प्रशासन,SIT गठन और स्पीडी ट्रायल ही एकमात्र रास्ता 

ज्ञापन में सीधे तौर पर सिस्टम की उस लचर कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया गया है, जिसके तहत ऐसे संगीन मामलों में भी जांच महीनों लटकी रहती है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच के लिए तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए, जो समय सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच पूरी करे। इसके साथ ही मामले की सुनवाई 'स्पीडी ट्रायल' (त्वरित न्यायालय) के माध्यम से कर फौरन न्याय सुनिश्चित किया जाए। कानून व्यवस्था को मजबूत करने और पीड़ित परिवार को तत्काल उचित वित्तीय सहायता व पुख्ता सरकारी सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। इस ज्ञापन की प्रतिलिपियां प्रधानमंत्री, महामहिम राज्यपाल राजस्थान और मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार को भी आवश्यक और त्वरित कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं। अब देखना यह है कि प्रशासनिक अमला इस गंभीर और आक्रोशित चुनौती को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर कागजी खानापूर्ति कर ठंडे बस्ते में डाल देता है।

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