सिस्टम की नाकामी का शिकार भगवान,बुढ़ार सीएचसी में स्नेक बाइट से मौत पर भारी बवाल, डॉक्टर पर जानलेवा हमला और तोड़फोड़

सिस्टम की नाकामी का शिकार भगवान,बुढ़ार सीएचसी में स्नेक बाइट से मौत पर भारी बवाल, डॉक्टर पर जानलेवा हमला और तोड़फोड़ 


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और सुरक्षा के खोखले दावों के बीच एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली और प्रशासनिक रीढ़ पर सवाल उठाने वाली खौफनाक वारदात सामने आई है। जिले में लगातार बढ़ते 'स्नेक बाइट' (सर्पदंश) के मामलों के बीच, बुढ़ार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) शनिवार को उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया जब इलाज कर रहे एक ऑन-ड्यूटी डॉक्टर पर आक्रोशित परिजनों ने न सिर्फ जानलेवा हमला कर दिया, बल्कि पूरे सरकारी अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की। बुढ़ार थाना क्षेत्र के धनपुरा गांव की रहने वाली 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला प्रेमा सिंह को सांप ने काट लिया था, जिसके बाद परिजन उन्हें नाजुक हालत में तत्काल सीएचसी बुढ़ार लेकर पहुंचे थे। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर कुलदीप सिंह पूरी मुस्तैदी के साथ वृद्ध महिला का इलाज कर रहे थे, लेकिन उपचार के दौरान ही महिला ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर सुनते ही तीमारदारों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने इलाज में लापरवाही का मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए सीधे डॉक्टर पर ही धावा बोल दिया। कमरे में बंद होकर डॉक्टर ने बचाई जान,स्वास्थ्य अमला बोला- ऐसे खौफ के साए में कैसे करें इलाज? अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए हमलावरों ने न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि डॉक्टर कुलदीप सिंह के साथ लात-घूंसों से बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी थी कि डॉक्टर को अपनी जान बचाने के लिए खुद को अस्पताल के एक कमरे में भागकर अंदर से लॉक करना पड़ा। अगर डॉक्टर समय रहते खुद को कमरे में बंद नहीं करते, तो कोई भी अनहोनी घट सकती थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएमओ डॉ. सचिन कारखुर ने पुष्टि की कि महिला का नियमानुसार इलाज किया जा रहा था, परंतु मौत के बाद परिजनों ने अचानक उग्र होकर हमला कर दिया। इस घटना से आक्रोशित और डरे हुए डॉक्टरों तथा नर्सिंग स्टाफ ने काम बंद कर सीधे बुढ़ार थाने का रुख किया और आरोपियों के खिलाफ तत्काल सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की। यह घटना शहडोल के स्वास्थ्य महकमे और स्थानीय प्रशासन के मुंह पर करारा तमाचा है, जो फ्रंटलाइन वारियर्स को न्यूनतम सुरक्षा देने में भी पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। अगर डॉक्टरों पर इसी तरह जानलेवा हमले होते रहे, तो ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह ठप होना तय है।

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