तीन वर्षों से मिर्गी का इलाज करा रही महिला में मिला इंसुलिनोमा, समय पर सही निदान से मिली राहत
Junaid Khan - शहडोल। 04 जुलाई 2026 जिला चिकित्सालय शहडोल के चिकित्सकों ने एक जटिल एवं दुर्लभ बीमारी का सफलतापूर्वक निदान कर एक महिला को नई जिंदगी देने का कार्य किया है। पिछले लगभग तीन वर्षों से मिर्गी (एपिलेप्सी) समझकर विभिन्न शहरों में उपचार करा रही 56 वर्षीय महिला की वास्तविक बीमारी का पता शहडोल जिला अस्पताल में चला। महिला लंबे समय से बार-बार दौरे पड़ना, घबराहट, अत्यधिक पसीना आना, चक्कर, बेहोशी, अनिद्रा, चिंता एवं अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रही थी। नागपुर, भोपाल एवं रायपुर सहित कई शहरों में महंगे उपचार, एमआरआई, ईईजी एवं अन्य जांच कराने के बावजूद बीमारी का सही कारण सामने नहीं आ सका था। जिला अस्पताल में न्यूरो साइकियाट्रिस्ट एवं नशा मुक्ति विशेषज्ञ डॉ. सुमित दास गुप्ता (एमबीबीएस, एमडी मनोरोग) ने मरीज की विस्तृत जांच एवं पुराने चिकित्सकीय रिकॉर्ड का गहन अध्ययन किया। जांच के दौरान पाया गया कि महिला के दौरे सामान्य मिर्गी से भिन्न थे तथा पुराने रिकॉर्ड में कई बार रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर असामान्य रूप से कम दर्ज किया गया था। इसके बाद कराई गई विशेष जांचों में मरीज के शरीर में इंसुलिन और सी-पेप्टाइड का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया तथा सीईसीटी (CECT Abdomen) जांच में अग्न्याशय (पैंक्रियास) के पास लगभग 18×17 मिमी का ट्यूमरनुमा घाव दिखाई दिया। चिकित्सकीय परीक्षणों के आधार पर महिला में इंसुलिनोमा (Insulinoma) नामक दुर्लभ बीमारी की पुष्टि हुई, जो लगातार ब्लड शुगर कम होने का कारण बन रही थी। सही बीमारी की पहचान होने के बाद अनावश्यक एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कमी की गई तथा मरीज को हाइपोग्लाइसीमिया के शुरुआती लक्षण पहचानने, हमेशा ग्लूकोज या ग्लूकोज टैबलेट साथ रखने एवं आवश्यक उपचार संबंधी परामर्श दिया गया। इसके साथ ही अनिद्रा एवं अवसाद के लिए भी उपचार शुरू किया गया। कुछ समय के फॉलो-अप के दौरान मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया तथा पहले की तरह दौरे आना बंद हो गए। मरीज की मानसिक एवं शारीरिक स्थिति में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला। मरीज के पति मनोज ने जिला अस्पताल के चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों तक विभिन्न शहरों में उपचार कराने के बावजूद बीमारी का सही कारण सामने नहीं आया था, लेकिन शहडोल जिला अस्पताल में सही दिशा में जांच होने से उनकी पत्नी को नई जिंदगी और भविष्य के प्रति नई उम्मीद मिली है। डॉ. सुमित दास गुप्ता ने कहा कि "हर दौरा मिर्गी नहीं होता। यदि मरीज में बार-बार ब्लड शुगर कम होना, अत्यधिक पसीना आना, घबराहट, धड़कन तेज होना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो अन्य संभावित कारणों की भी व्यवस्थित जांच आवश्यक है। समय पर सही निदान से मरीज को अनावश्यक उपचार और मानसिक पीड़ा से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के सरकारी अस्पतालों में भी यदि विस्तृत इतिहास, सावधानीपूर्वक परीक्षण एवं तार्किक चिकित्सकीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तो जटिल एवं दुर्लभ बीमारियों का सफलतापूर्वक निदान संभव है।
