इंदिरा चौक से न्यू बस स्टैंड मार्ग बना 'सड़क दुर्घटनाओं का नया डेथ जोन', पहली ही बारिश ने खोली दावों की पोल, जवाबदेही से बच रहे जिम्मेदार
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल के सबसे व्यस्ततम और महत्वपूर्ण मार्गों में शुमार इंदिरा चौक से न्यू बस स्टैंड रोड इन दिनों आम जनता के लिए किसी सजा से कम नहीं रह गया है। अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत प्रशासन ने करोड़ों के तामझाम और बुलडोजर की दहाड़ के साथ निर्माण तो ढहा दिए और वाहवाही लूटने के लिए मलबे को भी आनन-फानन में हटा दिया, लेकिन इसके बाद जो सबसे जरूरी कदम था—वह प्रशासनिक फाइलों में ही दबा रह गया। प्रस्तावित 17 मीटर चौड़ी सड़क निर्माण के लिए रास्ता साफ होने के बाद प्रशासनिक दूरदर्शिता की भारी कमी साफ दिखाई दे रही है। मानसून की पहली दस्तक ने ही इस पूरे मार्ग को एक भयानक दलदल और तालाबों में तब्दील कर दिया है। चौड़ीकरण की आड़ में अधूरी छोड़ी गई इस बदइंतजामी ने अब राहगीरों और वाहन चालकों के सामने सुरक्षा का एक बेहद गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, जिससे हर पल किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रहती है। प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि जिस मार्ग पर रोजाना हजारों लोगों और वीआईपी वाहनों की आवाजाही होती है, उसे मलबे की सफाई के बाद बिना किसी समतलीकरण या वैकल्पिक इंतजाम के उसके हाल पर छोड़ दिया गया। सड़क के बीचों-बीच और किनारों पर बने जानलेवा गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने के कारण यह पता लगाना नामुमकिन हो गया है कि सड़क कहाँ है और गड्ढा कहाँ। विकास के नाम पर सहयोग करने वाली शहडोल की भोली-भाली जनता अब इस जर्जर, कीचड़ से लथपथ और गड्ढायुक्त मार्ग से गुजरने को अभिशप्त है। जिन स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने प्रशासन के आह्वान पर खुद आगे आकर अपने निर्माण तोड़े थे, आज वे खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कीचड़ और गहरे गड्ढों के बीच से संतुलन बनाकर गुजरना दोपहिया वाहन चालकों के लिए सर्कस के खेल जैसा जोखिम भरा हो गया है, जहाँ जरा सी चूक सीधे अस्पताल का रास्ता दिखा सकती है। यह स्थिति सीधे तौर पर नगर प्रशासन और निर्माण से जुड़ी जिम्मेदार एजेंसियों की गंभीर कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। आखिर मानसून से ठीक पहले इस तरह की योजना क्यों बनाई गई, जिसके पूरा होने का कोई निश्चित रोडमैप तैयार नहीं था? जनता का सीधा सवाल है कि जब तक वास्तविक सड़क निर्माण कार्य तकनीकी कारणों से शुरू नहीं हो पा रहा था, तब तक इन गहरे गड्ढों को मुरम या गिट्टी डालकर समतल क्यों नहीं किया गया? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? स्थानीय निवासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बनाते हुए मांग की है कि इस दोहरी मुसीबत से निजात दिलाने के लिए तत्काल युद्ध स्तर पर गड्ढों की भराई की जाए और इसे सुरक्षित आवागमन योग्य बनाया जाए, अन्यथा जनता इस प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
