उच्च शिक्षा विभाग की 'घोर लापरवाही' के खिलाफ शहडोल में फूटा आक्रोश

वर्षों से लंबित जायज मांगों को लेकर प्राध्यापकों ने सीधे सरकार को घेरा, विधायक को सौंपा अल्टीमेटम ज्ञापन


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में बैठे आला अफसरों की प्रशासनिक बेरुखी और फाइलों को दबाकर बैठने की लचर कार्यप्रणाली अब प्राध्यापकों के सब्र का बांध तोड़ रही है। शहडोल संभाग के शासकीय महाविद्यालयों में सालों से सेवाएं दे रहे उच्च शिक्षित वर्ग को अपने जायज अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ रहा है। प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ की संभाग इकाई ने इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को सीधी चुनौती देते हुए स्थानीय विधायक मनीषा सिंह को एक तीखा और विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के जरिए प्राध्यापकों ने सीधे तौर पर उच्च शिक्षा विभाग की उस कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े किए हैं, जिसके कारण बैकलॉग और नियमितीकरण से वंचित सहायक प्राध्यापक आज भी करियर एडवांसमेंट (CAS) जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सालों से अटके पड़े इन संवेदनशील प्रकरणों को लेकर प्राध्यापक संघ ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अब भी प्रशासन की नींद नहीं खुली, तो यह आक्रोश बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। इस प्रशासनिक उपेक्षा की मार सिर्फ प्राध्यापकों पर ही नहीं, बल्कि महाविद्यालयों की रीढ़ कहे जाने वाले ग्रंथपालों (लाइब्रेरियन) और क्रीड़ा अधिकारियों (स्पोर्ट्स ऑफिसर्स) पर भी समान रूप से पड़ रही है। यूजीसी (UGC) के स्पष्ट और कड़े प्रावधानों के बावजूद विभाग इन अधिकारियों को उनके अनुरूप पदनाम और सेवा लाभ देने में लगातार टालमटोल कर रहा है, जो सीधे तौर पर नियमों की अवहेलना और अधिकारियों की मनमानी को दर्शाता है। पात्रता के बावजूद पदोन्नति का न मिलना और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षाविदों के मामलों को ठंडे बस्ते में डालना विभाग की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्राध्यापक संघ ने विधायक के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री से इस पूरे ढर्रे में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। हालांकि, विधायक मनीषा सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को इस मामले में सकारात्मक सहयोग का भरोसा देते हुए शासन स्तर पर आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या केवल आश्वासनों से प्राध्यापकों का यह सालों पुराना दर्द दूर होगा या फिर ब्यूरोक्रेसी हमेशा की तरह इस संवेदनशील मुद्दे को भी ठंडे बस्ते में डाल देगी? इस दौरान शासकीय इंदिरा गांधी गृह विज्ञान कन्या महाविद्यालय शहडोल इकाई के पदाधिकारियों समेत संभाग के तमाम वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे, जिन्होंने इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।

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