कानून व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल,धनपुरी में साड़ी गोदाम फूंकने वालों का सुराग नहीं, अमलाई में सरेआम गोली मारने वाले शूटर भी पुलिस गिरफ्त से बाहर,क्या सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिलाएगा महकमा?
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिले में कानून व्यवस्था और पुलिसिया इकबाल पूरी तरह वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है। अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे सरेआम वारदातों को अंजाम देकर पुलिस की मुस्तैदी को ठेंगा दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पुलिस लकीर पीटने और कागजी घोड़े दौड़ाने में मसरूफ है। जिले के दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों से आई तस्वीरें पुलिस की कार्यप्रणाली और सुस्त तफ्तीश की पोल खोलने के लिए काफी हैं। धनपुरी थाना अंतर्गत इमामबाड़ा के पास हुए साड़ी गोदाम अग्निकांड को करीब डेढ़ महीना (45 दिन) बीत चुका है, लेकिन पुलिस अब तक एक भी आरोपी की पहचान नहीं कर पाई है। पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। वहीं दूसरी तरफ, अमलाई थाना क्षेत्र के रामपुर में एक चिकन दुकान संचालक की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई, जहां वारदात के तीसरे दिन भी पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली हैं। ये दोनों घटनाएं साफ तौर पर तस्दीक करती हैं कि जिले में अपराधियों के भीतर से खाकी का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है और आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।
धनपुरी अग्निकांड, सीसीटीवी फुटेज के बावजूद 45 दिन से सो रही पुलिस, पीड़ित को 20 लाख की चपत
मामले की पहली बड़ी लापरवाही धनपुरी थाना क्षेत्र से सामने आई है, जहाँ लगभग डेढ़ माह पूर्व इमामबाड़ा के पास स्थित एक साड़ी गोदाम में सोची-समझी साजिश के तहत आग लगा दी गई थी। इस भीषण आगजनी में पीड़ित मोहम्मद अरशद के पुत्र के अनुसार लगभग 8 से 10 लाख रुपये की साड़ियां जलकर खाक हो गईं, साथ ही आग की भयावहता के कारण नवनिर्मित भवन की छत समेत पूरी इमारत जर्जर हो गई। पीड़ित को कुल मिलाकर 20 लाख रुपये से अधिक का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी वारदात का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद भी पुलिस ने महज 'अज्ञात' के खिलाफ मामला दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर ली। स्थानीय पुलिस के इस ढुलमुल रवैए और लापरवाही से तंग आकर आखिरकार पीड़ित ने नवागत पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है और घटना से जुड़े पुख्ता प्रमाण भी सौंपे हैं। नवागत एसपी ने मामले की सूक्ष्मता से जांच कराकर आरोपियों को जल्द पकड़ने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर डेढ़ महीने तक स्थानीय पुलिस किस वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त थी जो उसे आरोपियों का कोई सुराग तक नहीं मिला?
अमलाई हत्याकांड, नेशनल हाईवे पर 5 घंटे चक्काजाम के बाद भी तीसरे दिन पुलिस के हाथ खाली
पुलिस की नाकामी का दूसरा सबसे ताजा और खौफनाक चेहरा अमलाई थाना क्षेत्र के रामपुर में देखने को मिला। यहाँ सोमवार की रात बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों ने सरेआम चिकन दुकान संचालक रज्जन कहार (पिता दुर्गा कहार) पर सिर्फ इसलिए गोली दाग दी, क्योंकि उसने बदमाशों के हवाई फायर का विरोध किया था। गोली लगने से घायल रज्जन ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। इस दुस्साहसिक हत्याकांड के बाद पूरे अमलाई और रामपुर क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल व्याप्त हो गया। आक्रोशित परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने मंगलवार को श्रीवास्तव तिराहा नेशनल हाईवे पर शव रखकर करीब 5 घंटे तक चक्काजाम किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा जल्द से जल्द हत्यारों को गिरफ्तार करने के लिखित और मौखिक आश्वासन के बाद ही बमुश्किल जाम खोला गया था। लेकिन हकीकत यह है कि घटना के तीसरे दिन भी अमलाई पुलिस के हाथ कोई ऐसा ठोस सुराग नहीं लगा है जिससे शूटरों तक पहुंचा जा सके। अमलाई थाना प्रभारी भूपेन्द्रमणि पाण्डेय का कहना है कि टीमें लगातार सर्चिंग कर रही हैं और एक-दो दिन में आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा, लेकिन सरेआम हुई इस हत्या के बाद पुलिस की यह कछुआ चाल जनता के गले नहीं उतर रही है। आखिर कब तक पुलिस सिर्फ 'जल्द गिरफ्तारी' का झुनझुना थमाकर अपनी पीठ थपथपाती रहेगी?
