शाही रसूख के आगे नतमस्तक यातायात व्यवस्था,सरकारी गाड़ी से रोंगटे खड़े कर देने वाला स्टंट

क्या किसी मासूम की जान जाने के बाद जागेगा प्रशासन?


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल संभाग मुख्यालय के पांडवनगर स्थित एक नामी निजी स्कूल के ठीक सामने उस वक्त हड़कंप मच गया और बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे नजर आई, जब एक सफेद रंग की एसयूवी कार पानी से लबालब भरे मैदान में रोंगटे खड़े कर देने वाले स्टंट करने लगी। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गाड़ी के आगे का नंबर प्लेट जानबूझकर लाल रंग के कवर से ढका हुआ था, जबकि गाड़ी के पीछे 'मध्य प्रदेश शासन' लिखा होना बताया जा रहा है। स्कूल समय के दौरान खुलेआम की जा रही इस जानलेवा स्टंटबाजी का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे शहर में हड़कंप मच गया और सीधे तौर पर जिला प्रशासन व यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। स्थानीय गलियारों में दबी जुबान से चर्चा है कि यह लग्जरी वाहन किसी बड़े शासकीय कार्यालय में पदस्थ रसूखदार अधिकारी को आवंटित है, यही वजह है कि सरकारी हनक के नशे में चूर चालक ने मासूम बच्चों की जिंदगी को दांव पर लगाने में रत्ती भर भी संकोच नहीं किया। हालांकि, गनीमत यह रही कि उस वक्त मैदान में बच्चों की संख्या कम थी और एक बड़ा खूनी हादसा होते-होते टल गया, वरना प्रशासन के पास आज जवाब देते नहीं बनता।

मूकदर्शक बनी पुलिस, नियमों को ठेंगा दिखाते हुड़दंगी,आम जनता पूछ रही,वीआईपी बोर्ड लगी गाड़ियों को सात खून माफ क्यों? 

इस सनसनीखेज घटना ने यह साबित कर दिया है कि शहडोल की सड़कों और संवेदनशील इलाकों में यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाना अब रसूखदारों के लिए एक शगल बन चुका है। जिस मैदान में यह मौत का खेल खेला जा रहा था, वहां मवेशी चर रहे थे और अन्य राहगीर भी मौजूद थे, जो इस अनियंत्रित तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। स्थानीय नागरिकों का गुस्सा इस बात को लेकर सातवें आसमान पर है कि स्कूलों के आसपास जहां 'नो हॉकिंग' और गति सीमा सबसे कम होनी चाहिए, वहां मॉडिफाइड साइलेंसर, तेज रफ्तार और स्टंटबाजी का नंगा नाच चल रहा है। शहरवासियों ने सीधे तौर पर पुलिस को चुनौती देते हुए पूछा है कि आखिर वीआईपी और सरकारी नाम पट्टिका लगी गाड़ियों के खिलाफ नियमित और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? क्या पुलिस विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते इन बेलगाम सरकारी और निजी वाहनों के खिलाफ सख्त कानूनी हंटर नहीं चलाया गया, तो भविष्य में किसी भी समय पांडवनगर और स्कूल के आसपास का यह इलाका किसी भीषण अप्रिय घटना का गवाह बन सकता है। अब देखना यह है कि इस वायरल वीडियो के बाद प्रशासन इस रसूखदार 'शासकीय वाहन' और उसके चालक पर शिकंजा कसता है या हमेशा की तरह मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।

Previous Post Next Post