खाकी बेअसर, खौफ में ग्रामीण,सरेआम तलवार लहराते युवक के सामने बेबस दिखी पुलिस, 'मानसिक स्थिति' का बहाना बना पल्ला झाड़ा

खाकी बेअसर, खौफ में ग्रामीण,सरेआम तलवार लहराते युवक के सामने बेबस दिखी पुलिस, 'मानसिक स्थिति' का बहाना बना पल्ला झाड़ा


Junaid Khan - शहडोल। जिले के कानून व्यवस्था के दावों को ठेंगा दिखाते हुए झींक बिजुरी चौकी के ग्राम सेमरिया में एक बार फिर खाकी का इकबाल तार-तार हो गया। यहाँ एक युवक हाथ में नंगी तलवार और धारदार हथियार लेकर खुलेआम ग्रामीणों के बीच दहशत फैलाता रहा, लेकिन पुलिस महकमा तमाशबीन बना रहा। चौंकाने वाली बात यह है कि जब ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुँची, तो आरोपी ने पुलिस के सामने भी वही दुस्साहस दोहराया और खुलेआम हथियार लहराते हुए आक्रामक व्यवहार किया। कानून को हाथ में लेकर नाचते इस खौफ के तांडव के सामने पुलिस बल पूरी तरह रक्षात्मक और बेबस नजर आया। सवाल यह उठता है कि अगर पुलिस ही उपद्रवियों के सामने दूरी बनाकर 'शांत कराने' का अभिनय करेगी, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।

इस पूरे गंभीर घटनाक्रम पर पर्दा डालने और अपनी नाकामी को छिपाने के लिए पुलिस ने अब 'मानसिक स्थिति' का पुराना और घिसा-पिटा बहाना आगे कर दिया है। चौकी प्रभारी रामपाल वर्मा का कहना है कि युवक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, इसलिए पुलिस ने उसके करीब जाने के बजाय दूरी बनाए रखी। लेकिन यह दलील क्षेत्र की जनता के गले नहीं उतर रही है। अगर युवक पहले भी ऐसी जानलेवा हरकतें कर चुका है और पुलिस को इसकी भनक थी, तो समय रहते उस पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी या किसी ग्रामीण की जान जाने का इंतजार कर रही थी? सरेआम धारदार हथियार से लैस हिंसक प्रवृत्ति के व्यक्ति को केवल 'नजर रखने' के नाम पर खुला छोड़ देना, सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और पुलिसिया तंत्र की नाकामी को बयां करता है, जिसने पूरे सेमरिया गाँव को खौफ के साए में जीने को मजबूर कर दिया है।

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