महा-घोटाले की बू,नगर पालिका में टेंडरों का 'खेलरचना',चहेतों को उपकृत करने के लिए उपयंत्रियों ने ताक पर रखे शासन के नियम

प्रशासनिक तानाशाही को बड़ी चुनौती,मानक शर्तों को दरकिनार कर जोड़ी जा रही मनचाही शर्तें; ईई की सख्ती के बाद भी आंखें मूंदे बैठा है शहडोल नपा प्रशासन, अब 'जेब' से भरनी होगी वसूली की राशि 


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल संभाग नगरीय निकायों में जनता के टैक्स की कमाई और सरकारी खजाने पर किस कदर डाका डाला जा रहा है, इसका एक और सनसनीखेज सच उजागर हुआ है। नगर पालिका के भीतर बैठे कुछ रसूखदार उपयंत्री (सब-इंजीनियर) और ठेकेदारों की जुगलबंदी ने टेंडर प्रक्रिया को अपनी बपौती बना लिया है। शासन द्वारा समय-समय पर जारी मानक निविदा प्रपत्रों (Standard Tender Documents) में किए गए संशोधनों को सीधे तौर पर ठेंगा दिखाते हुए, उपयंत्री बिना किसी सक्षम स्वीकृति के अपनी मनचाही शर्तें जोड़कर टेंडरों का बंदरबांट कर रहे हैं। इस प्रशासनिक अराजकता और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले खेल पर अब जेडी ऑफिस शहडोल के कार्यपालन यंत्री (ईई) देवेंद्र कोल ने कड़ा प्रहार किया है। ईई ने साफ तौर पर चेताया है कि टेंडर में मनचाही शर्त जोड़ना पूर्णतः गलत और गैरकानूनी है, और यदि इस लापरवाही या मिलीभगत के कारण कोई भी टेंडर निरस्त होता है, तो उससे होने वाले वित्तीय नुकसान की पाई-पाई संबंधित उपयंत्री की जेब से वसूली जाएगी। इस सख्त हिदायत के बाद पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन उपयंत्रियों को शासन के नियमों को दरकिनार करने की शह दे कौन रहा है?

रिवाइज टेंडर' का संदिग्ध खेल,सुरक्षा निधि और बिलो राशि का गायब होना खड़ा कर रहा बड़ा भ्रष्टाचार का सवाल 

पूरी व्यवस्था को खुली चुनौती देता यह खेल यहीं खत्म नहीं होता। शहडोल नगर पालिका में इन दिनों 'रिवाइज टेंडर' का एक ऐसा संदिग्ध और बड़ा खेल चल रहा है जो सीधे तौर पर करोड़ों रुपये के राजस्व को चूना लगा रहा है। विभागीय जानकारों की मानें तो कार्यपालन यंत्री द्वारा टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए जाने के बाद अब पूर्व के टेंडरों के बाद जारी हुए रिवाइज्ड टेंडर भारी चर्चा और जांच के दायरे में हैं। आरोप हैं कि कई रिवाइज टेंडर ऐसे शातिर तरीके से तैयार किए गए हैं, जिनमें सुरक्षा निधि (Security Deposit) और पूर्व के टेंडर में आई 'बिलो राशि' (Below Rate Amount) के अंतर की राशि को सरकारी खाते में जमा ही नहीं कराया गया है। यह सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। आखिर किसके इशारे पर बिना राशि जमा कराए इन रिवाइज टेंडरों को हरी झंडी दी जा रही है? ईई की इस हिदायत ने साफ कर दिया है कि नगर पालिका प्रशासन के भीतर नियम-कायदे पूरी तरह वेंटिलेटर पर हैं और जनता के पैसों से अपनी तिजोरियां भरने वाले इन चेहरों को अब बेनकाब करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

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