सड़कों पर 'काल' बनती दुर्घटनाओं को रोकने के लिए 'कामधेनु' का सुरक्षा कवच: बेसहारा गौवंश को मिलेगा अब अटल आश्रय

अटल कामधेनु गोशाला संस्थान की सराहनीय पहल, सड़कों पर तड़पते गौवंश और हादसों से मिलेगी मुक्ति; गौरव मिश्रा ने जताई बड़ी प्रतिबद्धता, जनता से की सहभागिता की अपील


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल संभाग सहित जिले भर में इन दिनों आवारा और बेसहारा गौवंश के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर स्थानीय सड़कों पर आए दिन होने वाले भीषण सड़क हादसे जिला प्रशासन और आम जनता के लिए गहरी चिंता का विषय बने हुए हैं। दूध न देने की स्थिति में वृद्ध गायों, सांडों और नर बछड़ों को सड़कों पर लावारिस छोड़ देने की अमानवीय प्रवृत्ति के कारण न सिर्फ मूक पशु कसाइयों व असामाजिक तत्वों का शिकार हो रहे हैं, बल्कि रात के अंधेरे में ये बेकसूर गौवंश असमय सड़क हादसों में काल के गाल में समा रहे हैं, जिससे मानव जीवन पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है। इस संवेदनशील और विकट समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय प्रशासन की मंशा के अनुरूप और सामाजिक सरोकारों को गति देते हुए जिले के 'अटल कामधेनु गोशाला संस्थान' (कल्याणपुर) ने एक अत्यंत सराहनीय और युगांतकारी बीड़ा उठाया है। संस्थान के मार्गदर्शक गौरव मिश्रा ने समाज के हर वर्ग से मर्मस्पर्शी अपील करते हुए कहा है कि यदि कोई भी पशुपालक किसी भी विवशता या आर्थिक कारणवश अपनी वृद्ध गाय, नर बछड़े अथवा बैल का पालन-पोषण करने में असमर्थ है, तो उन्हें सड़कों पर लावारिस छोड़ने की आत्मघाती भूल कतई न करें। गौरव मिश्रा ने दो टूक शब्दों में जनमानस को सचेत करते हुए कहा कि सड़कों पर छोड़े गए गौवंश न केवल गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार होकर तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं, बल्कि कतिपय असामाजिक तत्वों और क्रूर कसाइयों के चंगुल में भी फंस जाते हैं, जो कि हमारी सनातनी संस्कृति और मानवता पर एक बड़ा कलंक है। ऐसे सभी असहाय पशुओं को जीवनदान देने के लिए कल्याणपुर स्थित 'अटल कामधेनु गोशाला संस्थान' पूरी तरह तत्पर है। संस्थान ने दावा किया है कि यहाँ लाए जाने वाले हर छोटे-बड़े गौवंश की उचित देखरेख, पौष्टिक आहार, सुरक्षा और नि:स्वार्थ चिकित्सा-सेवा का संपूर्ण प्रबंध पूरी मुस्तैदी से किया जाएगा। सजग पत्रकारिता के दृष्टिकोण से देखा जाए तो संस्थान का यह कदम जिला व पुलिस प्रशासन के उन थकाऊ प्रयासों को भी बड़ी राहत देगा, जो लंबे समय से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए जूझ रहे हैं। यह महज एक गोसेवा का अनुष्ठान नहीं है, बल्कि शहडोल की सड़कों को सुरक्षित बनाने और मानव जीवन की रक्षा करने का एक अभूतपूर्व और अनुकरणीय महाअभियान है। संस्थान ने आम जनता की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर 9340503534 भी जारी किया है, ताकि कोई भी नागरिक या पशुपालक सीधे संपर्क कर इस पुनीत कार्य का हिस्सा बन सके और शहडोल का कोई भी गौवंश सड़क पर असहाय न भटके।

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