रजिस्ट्री कार्यालय में तानाशाही और अवैध वसूली का खेल, उप-पंजीयक पर मनमानी के गंभीर आरोप, जनता त्रस्त

सर्विस प्रोवाइडरों ने कमिश्नर सुरभि गुप्ता से की तीखी शिकायत, नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाकर आम नागरिकों के उत्पीड़न का पर्दाफाश


Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय स्थित उप पंजीयक (रजिस्ट्री) कार्यालय इन दिनों भ्रष्टाचार, मनमानी और प्रशासनिक तानाशाही का गढ़ बन चुका है। हाल ही में पदभार संभालने वाले सब-रजिस्ट्रार सचिन जैन की कार्यशैली से परेशान होकर अब क्षेत्र के सर्विस प्रोवाइडर और आम नागरिक खुले तौर पर लामबंद हो गए हैं। गुरुवार को रजिस्ट्री का काम करने वाले लगभग 90 प्रतिशत सर्विस प्रोवाइडरों ने एकजुट होकर कमिश्नर सुरभि गुप्ता के समक्ष उपस्थित दर्ज कराई और उप-पंजीयक के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं, अवैध वसूली और पक्षकारों के उत्पीड़न की लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की। कमिश्नर कार्यालय पहुंचे शिकायतकर्ताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि इस बेलगाम कार्यप्रणाली पर अविलंब अंकुश नहीं लगाया गया, तो आम जनता का शासकीय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा।

आवासीय भूखंडों को व्यावसायिक बताकर स्टाम्प ड्यूटी में 'कमीशन का खेल', फर्जी आपत्तियों से अटकाए जा रहे मामले

कमिश्नर को सौंपे गए ज्ञापन में शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उप-पंजीयक द्वारा मध्य प्रदेश शासन की गाइडलाइन एवं प्रचलित पंजीयन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार का जाल फैलाया गया है। जो भूखंड स्पष्ट रूप से आवासीय श्रेणी के हैं, उन्हें जानबूझकर नियम-विरुद्ध तरीके से व्यावसायिक श्रेणी में दर्शाया जा रहा है, ताकि बाजार मूल्य एवं स्टाम्प शुल्क का कृत्रिम रूप से अत्यधिक निर्धारण किया जा सके। इसके बाद पंजीयन कार्य के नाम पर पक्षकारों और आम नागरिकों पर अनुचित आर्थिक दबाव बनाकर अवैध धनराशि की मांग की जाती है। इतना ही नहीं, जिओ टैगिंग जैसी तकनीकी व्यवस्था का भी मनमाने ढंग से दुरुपयोग कर आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। सह-खातेदार एवं संयुक्त खातों से जुड़े पंजीयन प्रकरणों में बेबुनियाद व अनावश्यक आपत्तियां लगाकर फाइलों को अनिश्चितकाल के लिए लंबित रख दिया जाता है। नियमों की गलत और मनगढ़ंत व्याख्या कर आम नागरिकों का मानसिक, प्रशासनिक व आर्थिक उत्पीड़न करना कार्यालय का रोजमर्रा का शगल बन चुका है। सर्विस प्रोवाइडरों ने पूर्व में पंजीकृत किए गए दस्तावेजों की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि जनता की गाढ़ी कमाई की लूट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

(अधिकारी का पक्ष)

उप-पंजीयक का दावा:"स्टाम्प ड्यूटी चोरी रोकने और रिकवरी के कारण लगाए जा रहे मनगढ़ंत आरोप"दूसरी ओर, सर्विस प्रोवाइडरों द्वारा कमिश्नर से की गई शिकायत और लगाए गए गंभीर आरोपों पर सफाई देते हुए उप-पंजीयक सचिन जैन ने कहा कि सर्विस प्रोवाइडर नियमानुसार व विधिवत दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करते हैं और निर्धारित स्टाम्प ड्यूटी जमा करने से बचते हैं। ऐसे मामलों को नियमानुसार जिला रजिस्ट्रार को भेजा जाता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे कई प्रकरणों में जुर्माना लगाया गया है, जिनमें किसी में साढ़े 9 लाख तो किसी में सवा 10 लाख रुपये तक के रिकवरी आदेश जारी हुए हैं। इसी रिकवरी और सख्त रवैये के कारण बौखलाकर मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए झूठी शिकायत की जा रही है। शासकीय राजस्व और स्टाम्प ड्यूटी की चोरी रोकने के कारण ही यह विरोध खड़ा किया जा रहा है।

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