सड़क पर मूक पशुओं पर कहर,लापरवाह रफ्तार ने ली मासूम बछिया की जान

अटल कामधेनु संस्थान ने सोहागपुर थाने में दर्ज कराई शिकायत,पुलिस जांच में जुटी


Junaid Khan - शहडोल। जिले की सड़कों पर बेकाबू रफ्तार और बेलगाम दौड़ते वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर मूक बेजुबान अपनी जान गंवा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों की खामोशी और वाहन चालकों की घोर लापरवाही से स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। ताज़ा मामला शहडोल के व्यस्ततम मार्ग भूसा तिराहा और कोन तिराहा के मध्य से सामने आया है, जहाँ 21 जुलाई 2026 की देर रात लगभग 10:00 बजे एक बेकाबू चार पहिया वाहन (क्रमांक MP21 ZC 2592) के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए एक मासूम बछिया को जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना दर्दनाक था कि बछिया लहूलुहान होकर सड़क पर ही तड़पने लगी। घटना की खबर फैलते ही क्षेत्रीय नागरिकों में भारी रोष व्याप्त हो गया। घटना की सूचना मिलते ही सामाजिक व मानवीय सरोकार का परिचय देते हुए 'अटल कामधेनु गौसेवा संस्थान, कल्याणपुर' की रेस्क्यू टीम बिना एक पल गंवाए तत्काल मौके पर पहुँची। टीम ने लहूलुहान बछिया को सुरक्षित उठाकर उपचार के लिए तत्काल पशु चिकित्सालय पहुँचाया। वहाँ उपस्थित चिकित्सकों और संस्थान के समर्पित गौसेवकों ने बछिया की जान बचाने के लिए देर रात तक हरसंभव कोशिश की और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई, परंतु अत्यधिक अंदरूनी चोटें और गंभीर घाव होने के कारण आखिरकार उस मासूम बेजुबान ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस हृदयविदारक घटना से गौभक्तों और स्थानीय लोगों में शोक व आक्रोश का माहौल है।

इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए अटल कामधेनु गौसेवा संस्थान ने सोहागपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराकर आरोपी वाहन चालक के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त वैधानिक कार्रवाई की पुरजोर मांग की है। संस्थान का स्पष्ट कहना है कि यदि ऐसे बेलगाम और लापरवाह चालकों पर कानून का कड़ा डंडा नहीं चला, तो मूक प्राणियों का जीवन यूँ ही संकट में पड़ता रहेगा। इस त्वरित रेस्क्यू और प्रशासनिक पहल को अंजाम तक पहुँचाने में बजरंग दल के श्री जय सिंह तोमर, समर्पित गौसेवक सागर गुप्ता सिंह, प्रियांश मिश्रा, अरुण सेन एवं आदर्श सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी इस निस्वार्थ सेवा और तत्परता की संस्थान सहित पूरे क्षेत्र में भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था, ट्रैफिक पुलिस की गश्त और नागरिकों के नैतिक दायित्वों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़कों पर रेंगते बेजुबानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल गौसेवकों की नहीं, बल्कि पुलिस-प्रशासन और समाज के हर नागरिक की साझी जिम्मेदारी है। बेकाबू रफ्तार पर नकेल कसने के लिए पुलिस को सघन चेकिंग अभियान चलाने की सख्त आवश्यकता है, वहीं वाहन चालकों को भी यह समझना होगा कि मूक प्राणियों की सांसें भी उतनी ही कीमती हैं जितनी किसी इंसान की।

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