बेकाबू हादसों पर सिस्टम को ललकार,SDOP ने घुटनों पर बैठकर जोड़े हाथ,तब शांत हुआ जनआक्रोश
Junaid Khan - शहडोल। जिले के धनपुरी थाना अंतर्गत बेमहौरी-देवहरा मार्ग पर सोमवार की दोपहर करीब 1:30 बजे एक ऐसा सड़क हादसा हुआ जिसने पूरे प्रशासनिक अमले और कोयला परिवहन प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बेमहौरी बस स्टैंड स्थित हनुमान मंदिर के सामने दामिनी कोल माइंस से संगमा कोल साइंडिंग की ओर जा रहे कोयला लोड हाइवा (CG 10 BL 9095) ने बाइक (MP 18 ML 5248) सवार 20 वर्षीय युवक राजेंद्र कोल निवासी संगमा को इतनी दर्दनाक टक्कर मारी कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक का शव हाइवा के नीचे ही फंस गया। इस भयावह घटना ने क्षेत्र में भारी जनआक्रोश की चिंगारी भड़का दी। कोयला परिवहन में लगे भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार और आए दिन हो रहे हादसों से उग्र हुए ग्रामीणों और परिजनों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की स्पष्ट मांग थी कि मौके पर महाप्रबंधक और उपक्षेत्रीय प्रबंधक पहुंचे और स्थिति का स्थाई समाधान निकालें। गुस्सा इस कदर था कि मांगें पूरी न होने तक करीब 7 घंटे तक शव को हाइवा के नीचे से निकालने नहीं दिया गया, जिससे पूरे मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। जहाँ एक तरफ भारी वाहनों की अनियंत्रित चाल ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए, वहीं दूसरी ओर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मैदान में उतरे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के संवेदनशील रवैये ने हर किसी को प्रभावित किया। घटना की सूचना मिलते ही स्थिति को संभालने मौके पर पहुंचे SDOP विकास पाण्डेय और तहसीलदार मनोज सिंह ने ग्रामीणों को समझाने का कड़ा प्रयास किया। जब जनआक्रोश चरम पर था और स्थिति बिगड़ने की कगार पर थी, तब SDOP विकास पाण्डेय ने अभूतपूर्व प्रशासनिक संवेदनशीलता और सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने पीड़ित स्वजनों के सामने खुद घुटनों के बल बैठकर, हाथ जोड़कर न केवल विनम्रतापूर्वक सहयोग की अपील की, बल्कि मामले में त्वरित कार्रवाई और निष्पक्ष जांच का ठोस भरोसा भी दिलाया। खाकी वर्दीधारी एक वरिष्ठ अधिकारी के इस मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण ने उग्र भीड़ के दिल को छू लिया। पुलिस की इस तत्परता, संयम और ज़मीनी समझ की वजह से ही घंटों से बना गतिरोध समाप्त हुआ और चक्काजाम खुल सका। पुलिस प्रशासन का यह कार्य यह साबित करता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी यदि संवाद और संवेदनशीलता का सहारा लिया जाए, तो किसी भी बड़े बवाल को टला जा सकता है।
