कोयलांचल में रसूख के नशे में चूर SECL कर्मी की तानाशाही, बेबस ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, क्या गहरी नींद से जागेगा शहडोल प्रशासन?

झूठी FIR और हत्या की साजिश रचने के खेल से पूरा सिगुड़ी गांव खौफ में,कलेक्टर की चौखट पर पहुंचे आक्रोशित ग्रामीण, दी उग्र आंदोलन की खुली चेतावनी।


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश के कोयलांचल क्षेत्र अंतर्गत सिगुड़ी गांव में इन दिनों प्रशासनिक नाकामी और एक रसूखदार सरकारी कर्मचारी के आतंक के कारण ज्वालामुखी सुलग रहा है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) में पदस्थ एक कर्मचारी, उदय भान (पिता स्वर्गीय सूरज सिंह), पर नौकरी, पैसे और अपनी ऊंची राजनीतिक व प्रशासनिक पहुंच के मद में चूर होकर पूरे गांव को बंधक बनाने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित ग्रामीणों का सब्र का बांध आखिरकार सोमवार को टूट गया, जब भारी संख्या में सिगुड़ी के आक्रोशित ग्रामीण लामबंद होकर कलेक्ट्री कार्यालय पहुंचे और सीधे कलेक्टर के नाम एक तीखा शिकायती पत्र सौंपा (जिस पर 29 जून की आधिकारिक सील भी दर्ज हो चुकी है)। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि आरोपी कर्मचारी न सिर्फ अपनी ऊंची पहुंच की धौंस दिखाता है, बल्कि पूरे गांव को झूठे मुकदमों में फंसाने के लिए ढाल के रूप में अपने ही परिवार को आगे कर 'मर्डर की साजिश' और आत्महत्या जैसी मनगढ़ंत कहानियां रच रहा है।

कानून को ठेंगा,पुलिसिया तंत्र पर दबाव और झूठी FIR का गंदा खेल

इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज और गंभीर खुलासा यह हुआ है कि आरोपी उदय भान गांव के हर छोटे-बड़े सामाजिक मामलों में जबरन हस्तक्षेप करता है। जब भी कोई ग्रामीण उसकी इस खुली तानाशाही और गुंडागर्दी का विरोध करने की हिम्मत जुटाता है, तो वह विवाद, गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू हो जाता है। हद तो तब हो जाती है जब खुद विवाद खड़ा करने के बाद वह अपनी पत्नी और मासूम बच्चों को ढाल बनाकर थाने पहुंच जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने यह कड़वा सच उजागर किया है कि आरोपी बड़े नेताओं और ऊंचे रसूखदार अधिकारियों से सीधे फोन कॉल करवाकर स्थानीय पुलिस पर भारी दबाव बनाता है, जिसके दम पर निर्दोष ग्रामीणों के खिलाफ मनगढ़ंत व झूठी FIR दर्ज करवा दी जाती है। आरोपी लगातार गांव वालों को यह कहकर डराता और ब्लैकमेल करता है कि "गांव वाले मेरा मर्डर कराना चाहते हैं, और अगर मुझे कुछ भी हुआ तो इसके जिम्मेदार यहां के नामजद लोग होंगे।" ग्रामीणों ने कलेक्टर को दो टूक शब्दों में अवगत कराया है कि उदय भान का चाल-चलन और विवादित रवैया उसकी नौकरी के स्थान पर भी जगजाहिर है, और उसकी इसी आपसी रंजिश व हरकतों के कारण कोल माइंस में करीब 23 नौकरियां तक अधर में लटकी हुई हैं।

प्रशासन को सीधी चुनौती,अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम" 

यह खबर सिर्फ एक गांव के विवाद की नहीं, बल्कि शहडोल के जिला प्रशासन और कानून व्यवस्था की साख को खुली चुनौती है। सिगुड़ी गांव के दर्जनों ग्रामीणों जिनमें कमल भान, शिवराज सिंह, युवराज सिंह, दीपक सिंह, बृजेंद्र सिंह, कल्याण सिंह सहित अन्य प्रमुख नागरिक शामिल हैं ने अपने हस्ताक्षरों और मोबाइल नंबरों के साथ यह सामूहिक शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों ने प्रशासन को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए चेतावनी दी है कि पूर्व में कई बार लिखित शिकायत करने के बावजूद इस रसूखदार कर्मी के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उसके हौसले सातवें आसमान पर हैं। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि आरोपी कोई आत्मघाती कदम उठाता है, तो उसमें पूरे गांव या किसी भी नामजद ग्रामीण की कोई गलती नहीं होगी, बल्कि वह स्वयं अपनी हरकतों का जिम्मेदार होगा। अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है या तो वह इस मामले को गंभीरता से लेकर ग्रामीणों को इस मानसिक और कानूनी प्रताड़ना से तत्काल मुक्त कराए, अन्यथा क्षेत्र की कानून व्यवस्था को ध्वस्त करने वाले एक उग्र और बड़े जन-आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे।

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