ओडिशा से राजस्थान खपाने की थी तैयारी,पुलिस व रेल प्रशासन की मुस्तैदी से नाकाम हुआ अंतरराज्यीय नेटवर्क, जनता ने की सराहना
Junaid Khan - शहडोल। मादक पदार्थों की अवैध तस्करी के खिलाफ रेल पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान को बड़ी सफलता हाथ लगी है। शहडोल रेलवे स्टेशन पर जीआरपी (शासकीय रेल पुलिस) और आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) की संयुक्त टीम ने सतर्कता और सूझबूझ का परिचय देते हुए अंतरराज्यीय गांजा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस टीम ने स्टेशन परिसर की घेराबंदी कर दो शातिर तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया, जिनके कब्जे से करीब 8 किलो 600 ग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया। जब्त किए गए गांजे का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 1 लाख 70 हजार रुपये आंका गया है। शासन और प्रशासन द्वारा नशे के सौदागरों के खिलाफ अपनाए जा रहे कड़े रुख के तहत की गई इस त्वरित कार्रवाई से न केवल रेलवे के जरिए तस्करी करने वाले गिरोहों में हड़कंप मच गया है, बल्कि आम जनता व यात्रियों ने भी सुरक्षा बलों की इस मुस्तैदी की जमकर सराहना की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को जीआरपी थाना प्रभारी आर.एम. झारिया के नेतृत्व में आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम रेलवे स्टेशन पर नियमित चेकिंग व संदिग्धों की धरपकड़ कर रही थी। इसी दौरान प्लेटफार्म के अंतिम छोर पर दो संदिग्ध व्यक्ति बैग के साथ बैठे दिखाई दिए, जो कटनी की ओर जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। पुलिस टीम को देखते ही उनकी गतिविधियों में घबराहट साफ नजर आई। जवानों ने बिना कोई मौका दिए तत्परता से दोनों को घेराबंदी कर हिरासत में लिया। जब उनके सामान की तलाशी ली गई, तो बैग से 8 किलो 600 ग्राम उच्च गुणवत्ता का गांजा बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान पकड़े गए आरोपियों की पहचान भक्ता मेहर (40 वर्ष) एवं राजकुमार निहाल (38 वर्ष), दोनों निवासी जिला कालाहांडी (ओडिशा) के रूप में हुई। प्राथमिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे मादक पदार्थ की यह खेप ओडिशा से राजस्थान ले जाकर भारी मुनाफे में खपाने की फिराक में थे। जीआरपी प्रभारी आर.एम. झारिया के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत सख्त कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इनके बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच कर रही है ताकि इस काले कारोबार से जुड़े पूरे गिरोह की जड़ों तक पहुंचा जा सके। सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि युवा पीढ़ी को नशे के गर्त में धकेलने वाले ऐसे अपराधियों और लापरवाह तत्वों के खिलाफ प्रशासन का यह सख्त अभियान लगातार जारी रहना चाहिए, जिससे सार्वजनिक परिवहन को नशा तस्करों की सुरक्षित पनाहगाह बनने से पूरी तरह रोका जा सके।
