इनामी बदमाश राजकुमार शर्मा का अब तक न मिलना पुलिसिया कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल,बड़े अफसरों की चुप्पी पर उठने लगी उंगलियां
Junaid Khan - शहडोल। अमलाई थाना क्षेत्र के रामपुर में हुए जघन्य चिकन दुकान संचालक हत्याकांड को 19 दिन का लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन खाकी के हाथ अब भी खाली हैं। वारदात को अंजाम देकर कानून को धत्ता बताने वाला मुख्य आरोपी और जिले का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर राजकुमार शर्मा पुलिस महकमे के दावे और एसआईटी (SIT) की तमाम दबिशों के बावजूद खुलेआम घूम रहा है। 21 जुलाई को पुलिस ने मददगारों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ भले थपथपा ली हो, लेकिन मुख्य हत्यारे की गिरफ्तारी न होना जिले की कानून-व्यवस्था की पोल खोल रहा है। हत्या जैसे सनसनीखेज अपराध के बाद भी पुलिसिया तंत्र का ढीला रवैया यह दर्शा रहा है कि अपराधियों में खाकी का रसूख और खौफ खत्म हो चुका है। जिले के आला अधिकारियों से लेकर स्थानीय पुलिस तक, सब केवल कागजी कोरम पूरा करने में लगे हैं, जिससे आम जनता और पीड़ित परिवार के बीच भारी असंतोष पनप रहा है। पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गहराता संशय और आला अधिकारियों को सीधी चुनौती। मध्य प्रदेश और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के विभिन्न थानों में दर्जनों गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बावजूद, एक इनामी हिस्ट्रीशीटर का लगातार फरार रहना प्रशासनिक तंत्र और खूफिया विभाग की नाकामी का जीता-जागता सबूत है। क्या SIT का गठन महज लीपापोती और जन-आक्रोश को दबाने का हथकंडा था? पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश और पूछताछ का राग अलाप रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मुख्य सरगना अब भी कानून की पहुंच से कोसों दूर है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इस दुर्दांत अपराधी को किस प्रशासनिक या राजनैतिक आका का संरक्षण प्राप्त है? यदि जिम्मेदार पुलिस अधिकारी 18 दिनों में एक नामजद और इनामी बदमाश को सलाखों के पीछे नहीं धकेल सकते, तो फिर आम जनता की सुरक्षा का दावा महज एक छलावा है। क्या पुलिस किसी और बड़े हादसे या जन-आंदोलन का इंतजार कर रही है?
