नवागत कलेक्टर व "सिंघम" एसपी के सामने भ्रष्टाचार की खुली चुनौती,बिना बिल, बिना रेट लिस्ट और गुंडागर्दी के दम पर मदिरा दुकानों में मची लूट
Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय शहडोल सहित पूरे जिले की देशी व विदेशी शराब दुकानों पर आबकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम महाभ्रष्टाचार का नंगा नाच चल रहा है। शराब ठेकेदार और आबकारी विभाग की साठगांठ से जिले की भोली-भाली जनता से तय अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से 20 रुपये से लेकर 300 रुपये तक अतिरिक्त राशि अवैध रूप से वसूली जा रही है। इस संगठित आर्थिक अपराध के कारण शासन को हर महीने वैट, एक्साइज, जीएसटी और सेल्स टैक्स में करोड़ों रुपये के राजस्व की सीधी क्षति पहुंचाई जा रही है। ताज्जुब की बात यह है कि जिले में नवागत कलेक्टर और कड़क कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले "सिंघम" पुलिस अधीक्षक की तैनाती के बावजूद आबकारी महकमा और शराब माफिया बेखौफ होकर अपनी जेबें भरने में मस्त हैं। शिकायतकर्ता क्रिस्टी अब्राहम, दुर्गेश द्विवेदी, अभिषेक अइजक, अखिलेश द्विवेदी एवं अमिताभ शर्मा द्वारा आबकारी आयुक्त ग्वालियर, आबकारी अधिकारी शहडोल, कमिश्नर, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक शहडोल को सौंपे गए शिकायती पत्र में सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं। शिकायत के अनुसार, पैंगुइन ट्रेडकॉम प्रा. लि., मे. मीरा लक्ष्मी एग्रो स्टेट प्रा. लि., प्रिंस राय, सत्येंद्र सूर्यवंशी, महाकालेश्वर एसोसिएट एवं राजू जायसवाल जैसे ठेकेदारों व कंपनियों द्वारा सुनियोजित साजिश और आपराधिक षड्यंत्र के तहत यह गोरखधंधा चलाया जा रहा है। दुकानों पर डिजिटल भुगतान (गूगल पे, फोन पे) के माध्यम से भी निर्धारित दर से अधिक राशि सीधे खातों में डलवाई जा रही है। उपभोक्ता जब खरीदारी का पक्का बिल मांगते हैं, तो बिल देने से साफ इंकार कर दिया जाता है, जिससे सीधे तौर पर टैक्स चोरी कर सरकारी खजाने पर डाका डाला जा रहा है। अवैध वसूली का विरोध करने वाले आम नागरिकों और उपभोक्ताओं के साथ शराब दुकानों पर तैनात कर्मचारियों द्वारा सरेआम गाली-गलौज, मारपीट और गुंडागर्दी की जाती है। उपभोक्ता फोरम के नियमों व अधिकारों की धज्जियां उड़ाते हुए कर्मचारी यह कहकर धौंस जमाते हैं कि "जहाँ शिकायत करनी है कर दो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, हमने सभी बड़े अधिकारियों को मैनेज किया हुआ है।" आबकारी नियमों के अनुसार प्रत्येक दुकान के बाहर स्पष्ट रेट लिस्ट चस्पा होना अनिवार्य है, लेकिन शहडोल में किसी भी दुकान पर रेट लिस्ट नहीं लगाई गई है। इतना ही नहीं, शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक ठेकेदारों द्वारा स्वयं के फायदे के लिए अवैध पैकारी करवाई जा रही है, जिससे शासन के "नशा मुक्ति अभियान" की मंशा पर पानी फिर रहा है। यह पूरा मामला मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 46(a), 47 एवं मप्र विदेशी मदिरा नियम 1996 / देशी मदिरा नियम 1995 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। इसके साथ ही, ग्राहकों से धोखाधड़ी कर अवैध लाभ कमाने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318 (धोखाधड़ी) एवं धारा 61 (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत यह गंभीर व दंडनीय अपराध है। जागरूक नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस संगठित सिंडिकेट, भ्रष्ट आबकारी अधिकारियों और आरोपी ठेकेदारों पर तत्काल प्राथमिक दर्ज कर लाइसेंस निरस्त नहीं किए गए और उच्च स्तरीय जांच समिति नहीं गठित की गई, तो वे न्याय के लिए माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर का दरवाजा खटखटाएंगे। अब देखना यह है कि जिले के नए प्रशासनिक कप्तान इस महाभ्रष्टाचार पर क्या कड़ा प्रहार करते हैं।
