ब्यौहारी कॉलेज में भ्रष्टाचार की गूंज,खनिज मद के 37 लाख डकारने का आरोप

अभाविप का फूटा गुस्सा, छात्रों ने कॉलेज प्रशासन व उच्च शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल


Junaid Khan - शहडोल। पंडित रामकिशोर शुक्ल शासकीय महाविद्यालय ब्यौहारी में वित्तीय अनियमिताओं और प्रशासनिक उदासीनता का एक बड़ा मामला गरमाता नजर आ रहा है। कॉलेज के बुनियादी विकास, छात्र सुविधाओं और शैक्षणिक उन्नयन के नाम पर खनिज मद (DMF) से जारी 37 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय छात्रों और जागरूक नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि इतनी बड़ी रकम स्वीकृत होने के बावजूद कॉलेज परिसर बदहाली के आंसू रो रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने प्राचार्य के समक्ष विरोध दर्ज कराते हुए साफ तौर पर हिसाब मांगा है कि आखिर 37 लाख रुपये की यह राशि कहां ठिकाने लगा दी गई और धरातल पर निर्माण कार्य क्यों नजर नहीं आ रहे हैं।

PM उषा योजना में भी खानापूर्ति, कागजों में सिमट रहे सेमिनार

प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने कॉलेज प्रबंधन पर प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत मिलने वाले बजट में भी भारी बंदरबांट का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर संचालित कार्यशालाएं और सेमिनार केवल कागजों और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गए हैं। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए लंबा समय बीत जाने के बावजूद अभी तक वार्षिक कैलेंडर जारी नहीं किया गया, जिससे छात्र अपनी पढ़ाई और आगामी गतिविधियों को लेकर असमंजस में हैं। इसके अलावा एडमिशन या दस्तावेज जमा करते समय छात्रों से फॉर्म के नाम पर वसूले जा रहे 30-30 रुपये के अवैध शुल्क को तुरंत बंद करने की मांग की गई है।

जर्जर भवन,असुरक्षित परिसर और शिक्षकों की मनमानी पर जांच की मांग 

छात्रों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि महाविद्यालय में न तो शुद्ध पेयजल की व्यवस्था है और न ही सुरक्षा के लिए मुख्य द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे या गार्ड लगाए गए हैं। लाइब्रेरी में नई किताबों और समाचार पत्रों का अभाव है, वहीं हिंदी विभाग सहित अन्य विषयों के प्राध्यापक समय सारिणी के अनुसार कक्षाएं लेने से कतराते हैं। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला संयोजक अमन त्रिपाठी, अजय सिंह बैस, नीलम कुशवाहा, बृजेश पाल, अंकुश त्रिपाठी और कपिल द्विवेदी समेत दर्जनों छात्रों ने स्पष्ट किया कि यदि खनिज मद के 37 लाख के खर्च और सेमिनारों के नाम पर हुई वित्तीय गड़बड़ी की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो छात्र संगठन सड़कों पर उतरकर व्यापक जन-आंदोलन करेगा।

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