लापरवाही की इंतहा,बाणसागर डैम के पास पुल पर बना खतरनाक गड्ढा, वायरल वीडियो ने खोली मेंटेनेंस के दावों की पोल
Junaid Khan - शहडोल। देवलोंद क्षेत्र में बाणसागर परियोजना अंतर्गत सोन नदी पर बना महासेतु एक बार फिर प्रशासनिक उपेक्षा और विभागीय अंधेरगर्दी का शिकार होकर ‘मौत का जाल’ बन चुका है। शहडोल-रीवा मुख्य मार्ग को जोड़ने वाले इस अत्यंत व्यस्त लाइफलाइन पुल के ज्वाइंट में एक बड़ा क्रैक और जानलेवा गड्ढा उभर आया है। विंध्य क्षेत्र की इस प्रमुख जीवनरेखा से 24 घंटे सैकड़ों छोटे-बड़े भारी वाहनों और यात्री बसों की आवाजाही जारी रहती है, मगर जिम्मेदार अफसर कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक भयावह वीडियो ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है, जिसमें इस दरार व गड्ढे से बचने के चक्कर में एक भारी ट्रक अनियंत्रित होकर पुल की रेलिंग से जा टकराया। गनीमत यह रही कि ट्रक रेलिंग तोड़कर सीधे नदी में नहीं गिरा, अन्यथा दर्जनों जिंदगियों का जलसमाधि लेना तय था।
हैरानी की बात यह है कि बीते वर्ष जून में भी इसी पुल का हिस्सा धंसने और बीच में खतरनाक गड्ढा बनने के बाद प्रशासन को आनन-फानन मे आवागमन बंद कर लीपापोती करनी पड़ी थी। महज कुछ महीनों के भीतर उसी ज्वाइंट पर दोबारा इतनी गहरी दरार का उभरना निर्माण व मरम्मत कार्य में हुई भारी गुणवत्ताहीनता और विभागीय कमीशनखोरी की ओर साफ इशारा करता है। स्थानीय नागरिकों और जागरूक वाहन चालकों ने इस पर कड़ा आक्रोश जताते हुए सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है। जनता का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते अधिकारियों ने कागजी घोड़े दौड़ाने के बजाय पुल का ठोस तकनीकी निरीक्षण नहीं कराया और पुख्ता मरम्मत नहीं की, तो किसी भी दिन मोरबी जैसा भीषण पुल हादसा विंध्य की धरती पर दोहराया जा सकता है। जनता के सीधे सवाल और जिम्मेदारों की जवाबदेही।
विभागीय अफसरों पर सवाल
क्या लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तकनीकी इंजीनियर किसी बड़े नरसंहार के बाद ही मौके पर सुध लेने पहुंचेंगे? घटिया पैचवर्क की जांच: पूर्व में हुए मरम्मत कार्य के नाम पर लाखों का बजट खपाने वाले ठेकेदारों और प्रमाण-पत्र जारी करने वाले अफसरों पर एफआईआर कब दर्ज होगी? सुरक्षा के शून्य इंतजाम: भारी यातायात दबाव वाले इस मुख्य रूट पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है और न ही गति सीमा को नियंत्रित करने के पुख्ता बैरिकेड्स।
