सड़कों के जाल से चमकेगी शहडोल की तकदीर,मिली ऐतिहासिक सौगात

सांसद हिमाद्री सिंह की पहल पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दी बड़ी मंजूरी; पुराने बाईपास को 4-लेन बनाने का रास्ता साफ, समय सीमा व गुणवत्ता पर रहेगी अधिकारियों की सख्त नजर


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल लोकसभा क्षेत्र में ढांचागत विकास और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी को लेकर एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। क्षेत्र की लोकप्रिय सांसद हिमाद्री सिंह के दूरदर्शी प्रयासों और लगातार की जा रही पैरवी रंग लाई है। नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर सांसद ने क्षेत्र की जनभावनाओं और लंबे समय से लंबित यातायात समस्याओं से जुड़ा एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा। जनहित के इस गंभीर मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने त्वरित निर्णय लिया और शहडोल शहर के सबसे व्यस्त एवं बदहाल माने जाने वाले पुराने बाईपास (आकाशवाणी, जयस्तंभ, बाणगंगा, बस स्टैंड से गोरतरा तक) को डिवाइडर युक्त 4-लेन मार्ग में बदलने के प्रस्ताव को तत्काल हरी झंडी दे दी। डबल इंजन सरकार के इस बड़े फैसले से न केवल दशकों पुरानी यातायात की समस्या का स्थायी समाधान होगा, बल्कि शहडोल को एक नई आधुनिक पहचान भी मिलेगी।

रिंग रोड व टूरिस्ट एक्सप्रेस-वे से खुलेगा विकास और रोजगार का द्वार 

इस अभूतपूर्व सौगात के साथ ही क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को नई गति देने के लिए कई अन्य महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की नींव रखी जा रही है। बैठक में शहडोल-अनूपपुर रिंग रोड, धार्मिक आस्था के केंद्र को जोड़ने वाले वाराणसी-अमरकंटक मार्ग, कटनी-मनेंद्रगढ़ 4-लेन हाईवे तथा कान्हा-बांधवगढ़-पन्ना टूरिस्ट एक्सप्रेस-वे पर भी गंभीरता से मंथन हुआ। केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया है कि जैसे ही इन परियोजनाओं की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार होकर प्राप्त होगी, उन्हें अविलंब स्वीकृत कर दिया जाएगा। इन एक्सप्रेस-वे और फोरलेन सड़कों के निर्माण से न केवल भारी वाहनों का दबाव शहर के अंदर से कम होगा, बल्कि संभागीय मुख्यालय शहडोल व्यापारिक, पर्यटन और औद्योगिक हब के रूप में उभरेगा। स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आम नागरिकों का आवागमन सुगम व सुरक्षित हो सकेगा।

गुणवत्ता में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, निर्माण एजेंसियों व जिम्मेदार अफसरों की बढ़ेगी जवाबदेही

विकास की इस महा-सौगात के बाद अब पूरा दारोमदार धरातल पर काम कराने वाले संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों पर टिक गया है। अक्सर देखा जाता है कि बड़ी परियोजनाओं में लेटलतीफी, खराब सामग्री और कागजी लीपापोती के कारण जनता को असुविधा का सामना करना पड़ता है। लेकिन इस बार शासन-प्रशासन का रुख साफ है। मंजूरी और बजट की कोई कमी नहीं होगी, इसलिए निर्माण कार्यों में किसी भी स्तर पर ठेकेदारों या अधिकारियों की लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीपीआर तैयार करने से लेकर सड़क निर्माण की समय-सीमा और गुणवत्ता पर संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की सीधी नजर रहेगी। यदि कोई एजेंसी या अफसर काम की गुणवत्ता में ढिलाई बरतता है तो उस पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग हो और शहडोल को अंतरराष्ट्रीय स्तर का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर मिल सके।

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