वन विभाग और विधिक सेवा प्राधिकरण की संयुक्त पहल, बच्चों ने लिया प्रकृति संरक्षण का संकल्प
Junaid Khan - शहडोल। पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण विस्तार की दिशा में शासन-प्रशासन के संयुक्त प्रयासों को उस वक्त बड़ा संबल मिला, जब ग्राम निपनिया स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बगैहा में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत गरिमामयी पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस महाअभियान में शासन की मंशा के अनुरूप वन विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, विद्यालय परिवार और स्थानीय ग्रामीणों ने अभूतपूर्व सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में आंवला, जामुन, आम, कटहल, पीपल, बरगद और हर्रा जैसे दर्जनों फलदार, छायादार एवं औषधीय महत्व के पौधे रोपे गए। आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनचेतना का संगम होता है, तो पर्यावरण संरक्षण का संकल्प धरातल पर जीवंत हो उठता है। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता दक्षिण शहडोल की वनमंडलाधिकारी सुश्री श्रद्धा पन्द्रे ने उपस्थित छात्र-छात्राओं और जनसामान्य को संबोधित करते हुए पौधों के पारिस्थितिकीय महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वृक्ष लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उनका संरक्षण और संवर्धन है। डीएफओ ने वन संपदा और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम हेतु व्यावहारिक उपाय साझा किए। कार्यक्रम में विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव व न्यायाधीश श्रीमती श्वेता परते तिवारी एवं विधिक सेवा अधिकारी श्री देवेन्द्र सिंह ने पर्यावरण संतुलन को जीवन के अधिकार से जोड़ते हुए कानूनी व नैतिक दायित्वों पर प्रकाश डाला। अधिकारियों ने पर्यावरण हितैषी नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशासन की सक्रियता की सराहना की। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य, वन परिक्षेत्राधिकारी श्री विनायक गौतम, श्री राजेश श्रीवास्तव सहित वन विभाग का मैदानी अमला और शिक्षकगण मुस्तैद रहे। छात्र-छात्राओं ने हाथों में पौधे थामकर ‘प्रकृति बचाएंगे, भविष्य संवारेंगे’ का गगनभेदी संदेश दिया। ग्रामीणों और विद्यार्थियों के इस उत्साह को देखकर अधिकारियों ने सराहना करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही धरती को हरा-भरा बनाया जा सकता है। रोपे गए सभी पौधों की नियमित देखरेख की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन व वन अमले को सौंपी गई, जिससे परिसर में हरियाली का नया अध्याय शुरू हुआ।
