संयुक्त सचिव प्रियंका दास ने छतवई में संत रविदास हस्तशिल्प हथकरघा केंद्र का किया निरीक्षण

काष्ठ शिल्प एवं कालीन तैयार करने वाले कारीगरों से की चर्चा,कला की सराहना की


Junaid Khan - शहडोल। 20 अगस्त 2026 भारत सरकार की संयुक्त सचिव प्रियंका दास ने आज जिले के ग्राम छतवई में संचालित संत रविदास हस्तशिल्प हथकरघा केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र में काष्ठ शिल्प, कालीन एवं अन्य हस्तशिल्प तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों से चर्चा कर उनके कार्य, प्रशिक्षण, उत्पादन एवं विपणन की जानकारी प्राप्त की। संयुक्त सचिव ने कारीगरों द्वारा तैयार किए जा रहे हस्तशिल्प की सराहना करते हुए स्थानीय पारंपरिक हुनर को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ने की इस पहल को महत्वपूर्ण बताया। निरीक्षण के दौरान संयुक्त सचिव ने कारीगरों द्वारा तैयार किए जा रहे काष्ठ शिल्प का अवलोकन किया तथा उसकी निर्माण प्रक्रिया और उत्पादों की विशेषताओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार किए गए ‘तरु शिल्प’ का क्रय भी किया। कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने बताया कि जिला खनिज मद से विकसित किए गए इस केंद्र में ग्रामीण परिवारों के पारंपरिक हुनर को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से 100 परिवारों को 100 दिवस का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान दरी, कालीन, काष्ठ शिल्प एवं गोंडी पेंटिंग सहित विभिन्न हस्तशिल्प विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। केंद्र में प्रशिक्षण का शुभारंभ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री दिलीप जायसवाल द्वारा किया गया था।

‘तरु शिल्प’ बनी स्थानीय हुनर की पहचान 

संत रविदास हस्तशिल्प केंद्र में तैयार किए जा रहे काष्ठ शिल्प को ‘तरु शिल्प’ नाम दिया गया है। स्थानीय कारीगरों की मेहनत, रचनात्मकता और पारंपरिक कला से तैयार यह शिल्प अब छतवई के स्थानीय हुनर की पहचान बन रहा है। हस्तशिल्प समिति का गठन कर केंद्र के माध्यम से कारीगरों को प्रशिक्षण, उत्पादन एवं बाजार से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

ऑनलाइन बाजार से जुड़ेंगे स्थानीय उत्पाद

छतवई के कारीगरों द्वारा तैयार किए जा रहे ‘तरु शिल्प’ एवं अन्य हस्तशिल्प उत्पादों को स्थानीय बाजार तक सीमित न रखते हुए देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने की पहल की जा रही है। इसके लिए ट्राइब्स इंडिया एवं अमेजॉन कारीगर जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से उत्पादों को जोड़कर बिक्री एवं विपणन की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस पहल से स्थानीय कारीगरों को व्यापक बाजार उपलब्ध होगा तथा उनके उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी। संत रविदास हस्तशिल्प हथकरघा केंद्र पारंपरिक कला को प्रशिक्षण, उत्पादन और बाजार से जोड़ते हुए ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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