सुस्त गश्त, बुलंद हौसले,बेखौफ चोरों ने खाकी को दी खुली चुनौती,

पटवारी के सूने मकान पर बोला धावा खाकी की सुस्ती के बीच स्थानीय नागरिकों की मुस्तैदी से उजागर हुई वारदात,रक्षाबंधन की छुट्टियों के बीच शहर में सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल के पुरानी बस्ती स्थित वार्ड क्रमांक 37 (छोटी दुर्गा मंदिर व अंडर ब्रिज के पास) में सुरक्षा व्यवस्था और खाकी के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए बेखौफ अज्ञात बदमाशों ने भीषण चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। कुसमहाखुर्द में पदस्थ पटवारी सुजीत तिवारी अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन के त्योहार पर गृह ग्राम बल्हौड़ (उमरिया) गए हुए थे। मकान को सूना पाकर शातिर चोरों ने योजनाबद्ध तरीके से सभी कमरों के ताले चटकाए और भीतर रखे सोने-चांदी के बहुमूल्य आभूषण जिनमें मंगलसूत्र, सुई-धागा, लॉकेट, पायल, बिछिया, नथ व बच्ची की सोने की चैन शामिल हैं तथा नगदी समेटकर रफूचक्कर हो गए। पीड़ित पटवारी जब वापस लौटे तो अलमारियों और दीवान के ताले टूटे तथा सारा सामान तितर-बितर मिला, जिसकी कुल संपत्ति की कीमत लगभग 50,000 रुपये आंकी गई है। यह पूरी घटना स्थानीय नागरिकों और ठेकेदार आशाराम गौतम व वहां कार्यरत मजदूरों की तत्परता और सतर्कता के कारण समय पर उजागर हो सकी। जब मजदूर सुबह निर्माण कार्य के लिए पहुंचे और मुख्य दरवाजा अंदर से बंद मिला, तो सतर्क नागरिकों ने तुरंत गृहस्वामी को सूचित किया, जिससे मामले का भंडाफोड़ हो सका। एक तरफ जहां आम जनता मुस्तैदी दिखाकर अपराधों को उजागर करने में अपनी सजग भूमिका निभा रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की रात्रि गश्त केवल कागजों तक सीमित रह गई है, जिसके चलते त्योहारों के मौसम में भी आम नागरिक अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस करने को मजबूर हैं। घटना की सूचना मिलने के काफी समय बाद हरकत में आई कोतवाली शहडोल पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 331(4) एवं 305(a) के तहत मामला (अपराध क्रमांक 0397/2026) दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच का जिम्मा सहायक उपनिरीक्षक रूप सिंह को सौंपा गया है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि पुलिस प्रशासन की इस लचर कार्यप्रणाली और ढुलमुल रवैये पर जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी कब तक पर्दा डालते रहेंगे? जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले अपराधियों पर लगाम लगाने के बजाय तंत्र केवल लकीर पीटने में व्यस्त दिखता है। अब देखना यह होगा कि सुस्त पड़ी शहडोल पुलिस इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करते हुए आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा पाती है या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में धूल फांकता रहेगा।

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