संघर्ष समिति की दिल्ली तक गुहार के बाद जगी उम्मीद, आरओबी निर्माण व लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए रेल मंत्रालय से मांग
Junaid Khan - शहडोल। प्रशासनिक अदूरदर्शिता और रेल विभाग की घोर लापरवाही का खामियाजा भुगत रही शहडोल की जनता ने आखिरकार अपनी ताकत दिखा दी है। पुरानी बस्ती स्थित रेलवे फाटक के समीप बने संकीर्ण व घटिया अंडरपास के कारण सालों से नारकीय जीवन जीने को मजबूर आम नागरिकों और ‘रेलवे फाटक संघर्ष समिति’ के कड़े रुख ने व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। जनता के लगातार उठते जन-आक्रोश और जमीनी संघर्ष को देखते हुए क्षेत्रीय सांसद हिमाद्री सिंह को आखिरकार इस गंभीर जनसमस्या को सर्वोच्च स्तर पर उठाने के लिए विवश होना पड़ा है। सांसद ने रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव को पत्र भेजकर पुरानी बस्ती में ओवर ब्रिज (ROB) निर्माण की तत्काल स्वीकृति देने और जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देशित करने की मांग की है। गौरतलब है कि प्रशासनिक अफसरों की अधकचरी योजना और रेलवे के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण निर्मित वर्तमान अंडरपास इतना संकीर्ण है कि यहां 24 घंटे जाम की स्थिति बनी रहती है। इतना ही नहीं, हल्की बारिश में ही जलभराव के कारण यह अंडरपास पूरी तरह अनुपयोगी हो जाता है। यह मार्ग केवल एक सामान्य रास्ता नहीं, बल्कि प्रसिद्ध कंकाली मंदिर, केंद्रीय विद्यालय, अस्पताल और नेशनल हाईवे को जोड़ने वाली मुख्य जीवनरेखा है। इस बदहाली के कारण एम्बुलेंस, स्कूली बसों, आपातकालीन सेवाओं और करीब 100 से अधिक गांवों के लाखों लोगों का आवागमन रोजाना बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद लंबे समय तक जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोते रहे और जनता की दुर्दशा पर आंखें मूंदे रहे।
स्थानीय प्रशासन और रेलवे विभाग के सुस्त रवैये से तंग आकर ‘रेलवे फाटक संघर्ष समिति’ के पदाधिकारियों ने खुद कमान संभाली और दिल्ली पहुंचकर सांसद हिमाद्री सिंह से मुलाकात की। समिति के सदस्यों ने दिल्ली में सांसद को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान अंडरपास से हो रही जानलेवा समस्याओं से अवगत कराया और रेलवे की उपलब्ध भूमि पर जल्द से जल्द फ्लाई ओवर ब्रिज (ROB) निर्माण कराने की पुरजोर मांग रखी। जनता के इस दबाव के बाद सांसद ने न केवल ओवर ब्रिज निर्माण हेतु पत्र जारी किया, बल्कि मुंबई और चेन्नई के लिए सीधी व लंबी दूरी की ट्रेन सुविधाओं की भी मौखिक बात रेल मंत्री के सामने रखी। इस पर रेल मंत्री की ओर से एक वर्ष के भीतर इन ट्रेनों को शहडोल से प्रारंभ करने का आश्वासन दिया गया है। अब देखना यह होगा कि जन-दबाव के बाद जागा रेल प्रशासन कब तक धरातल पर काम शुरू कराता है या फिर कागजी घोड़ों के बीच जनता यूं ही पिसती रहेगी।
