प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच मुस्लिम समाज की इस सराहनीय पहल ने जीता आम जनता व मरीजों का दिल
Junaid Khan - शहडोल। (मध्य प्रदेश)। पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब के यौम-ए-पैदाइश यानी ईद मिलादुन्नबी के मुबारक और रूहानी मौके पर 26 अगस्त 2026 को शहडोल शहर में भाइचारे और इंसानियत की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। इतवारी मोहल्ला स्थित 'दारुल उलूम अशरफ़िया मदरसा वेलफेयर सोसायटी' के ज़ेर-ए-सरपरस्ती मुस्लिम समाज के अकीदतमंदों ने सामाजिक सरोकार की अनूठी मिसाल पेश करते हुए जिला अस्पताल शहडोल पहुंचकर भर्ती मरीजों को फल वितरित किए। इस खिदमत-ए-खल्क के दौरान मदरसे की पूरी कमेटी, उलमा-ए-कराम और भारी तादाद में मुस्लिम नौजवानों ने हिस्सा लेकर मरीजों के जल्द सेहतमंद होने की दुआएं मांगी। इस पहल में हाफिज़ मोहम्मद कलीम अशरफी, हाजी अजीम, हाजी शव्वाल, मो रफ़ीक, मो राशिद, मो रोज़, अरबाज, सादिक और रिजवान समेत युवाओं की ऊर्जावान मौजूदगी ने इस सामाजिक कार्य को पूरी निष्ठा के साथ संपन्न कराया। अस्पताल परिसर में जब अकीदतमंदों ने बिना किसी भेदभाव के हर वार्ड में जाकर मरीजों का हाल-चाल जाना और उन्हें ताजे फल सौंपे, तो मरीजों और उनके तीमारदारों के चेहरे पर सुकून और मुस्कान तैर गई। स्थानीय नागरिकों और अस्पताल में मौजूद आम जनता ने इस पहल की दिल खोलकर सराहना की और इसे शहडोल की साझा संस्कृति व आपसी सौहार्द का जीवंत प्रतीक बताया। जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार द्वारा त्योहारों के शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन हेतु बनाए गए बेहतर माहौल और अस्पताल प्रबंधन की मुस्तैद व्यवस्थाओं के बीच इस आयोजन को बेहद सुगमता से पूरा किया गया। अस्पताल के संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और स्वास्थ्य अमले ने मदरसा वेलफेयर सोसायटी के इस मानवीय प्रयास की जमकर तारीफ की। अधिकारियों का कहना है कि मजहब से परे जाकर जरूरतमंदों और बीमारों की सेवा करना ही सच्चे अर्थों में इबादत है, और समाज के युवाओं का इस तरह आगे आना काबिले-तारीफ है। सरकार और स्थानीय प्रशासन की जनहितैषी नीतियों के अनुरूप, सामाजिक संस्थाओं का यह कदम जिला प्रशासन के सहयोग को और मजबूती प्रदान करता है। दारुल उलूम अशरफ़िया मदरसा वेलफेयर सोसायटी और मुस्लिम समाज की इस पहल ने न केवल कौमी एकता का संदेश दिया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि त्योहार खुशियां बांटने और सेवा भावना को मजबूत करने का बेहतरीन ज़रिया होते हैं।
