प्राचार्य की चुप्पी पर उठे सवाल,उच्च शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के कड़े रुख की जरूरत
Junaid Khan - शहडोल। शासकीय इंदिरा गांधी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पदस्थ एक सहायक प्राध्यापक पर नौकरी दिलाने के नाम पर हजारों रुपये हड़पने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायतकर्ता नर्मदा यादव (निवासी वार्ड क्रमांक 2, बंधैया टोला) का आरोप है कि महाविद्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी ने खुद को सहायक प्राध्यापक बताते हुए झांसा दिया था कि कॉलेज में चपरासी के पद पर एक महिला कर्मचारी की बेहद जरूरत है। पीड़ित को आश्वासन दिया गया था कि इस काम में अच्छा वेतन मिलेगा और भविष्य में कभी पद से नहीं हटाया जाएगा, लेकिन इसके एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई। पीड़ित के अनुसार, पारिवारिक और आर्थिक तंगी के कारण उसने अपनी पत्नी को रोजगार दिलाने की उम्मीद में 19 मई 2026 को संबंधित प्राध्यापक को 23,000 रुपये नकद और 2,000 रुपये ऑनलाइन माध्यम से, यानी कुल 25,000 रुपये का भुगतान किया था।
रकम ऐंठने के बावजूद न तो आज तक पीड़िता को काम पर रखा गया और न ही ली गई राशि वापस लौटाई जा रही है। हद तो तब हो गई जब पीड़ित ने अपनी जमा पूंजी वापस मांगी, तो आरोप है कि संबंधित प्राध्यापक गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू हो गया। पीड़ित ने पूरे मामले की लिखित शिकायत महाविद्यालय के प्राचार्य से करते हुए अपनी 25,000 रुपये की राशि वापस दिलाने अथवा चपरासी के पद पर नियुक्ति कराने तथा दोषी प्राध्यापक के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षा के मंदिर में बैठे ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ और संरक्षण के बिना इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव है? पीड़िता न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रही है, जबकि महाविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग इस गंभीर विषय पर आंखें मूंदे बैठा है। यदि जिला प्रशासन और विभागीय वरिष्ठ अधिकारी इस खुलेआम हो रही धांधली पर तुरंत संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो शासन-प्रशासन की निष्पक्षता और शून्य-सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) के दावों की साख पर गहरा बट्टा लगना तय है।
