सरकारी जंगल बेचने का खेल,कमिश्नर तक पहुंची जांच दबाने की शिकायत

गोहपारू में 27.44 हेक्टेयर वन भूमि पर कूटरचना का मामला, एसडीएम से रिपोर्ट न मिलने पर उठे प्रशासनिक नीयत पर सवाल


Junaid Khan - शहडोल। सरकारी संपत्तियों और कीमती वन भूमि की सुरक्षा को लेकर भले ही शासन-प्रशासन बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। जिले के गोहपारू तहसील क्षेत्र से एक ऐसा बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है, जिसने राजस्व महकमे और भू-माफिया के गठजोड़ की पोल खोलकर रख दी है। ग्राम उमरिया स्थित खसरा नंबर 703/4 की करीब 27.44 हेक्टेयर शासकीय जंगल मद की जमीन को नियमों को ताक पर रखकर निजी हाथों में सौंपने और उसकी ताबड़तोड़ बिक्री का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय नागरिकों एवं जागरूक शिकायतकर्ताओं की सजगता के कारण यह पूरा खेल बेनकाब हुआ है। आम जनता द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई गई इस आवाज ने अब प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि मामले की शिकायत सीधे संभाग कमिश्नर तक जा पहुंची है। शिकायत के मुताबिक, शासकीय जंगल मद की 27.44 हेक्टेयर भूमि में से करीब 2.004 हेक्टेयर का नियम विरुद्ध तरीके से सारिका प्रकाश के नाम व्यवस्थापन कर दिया गया। धांधली का आलम यह रहा कि व्यवस्थापन के बाद भी मूल खसरे में 27.44 हेक्टेयर रकबा दर्ज रहा और कूटरचना करते हुए अलग से खसरा नंबर 703/5 बना दिया गया। इसके बाद खेल यहीं नहीं रुका; 0.733 हेक्टेयर हिस्सा 8 मई 2025 को पंजीकृत विक्रय पत्र के जरिए नवनीत गौतम को बेचा गया और गोहपारू तहसीलदार न्यायालय के माध्यम से नामांतरण भी करा लिया गया। नक्शा तरमीम में भी भारी हेरफेर करते हुए खसरा नंबर 703/5/1 का नक्शा तय स्थान के बजाय दूसरी तरफ तरमीम कर दिया गया। इसके बाद नवनीत गौतम ने 10 अप्रैल 2025 को यह जमीन जयसिंह तनेजा और वर्षा तनेजा को बेच दी। इस पूरी प्रक्रिया में सारिका प्रकाश, प्रयास कुमार प्रकाश सहित तत्कालीन राजस्व निरीक्षक और तत्कालीन तहसीलदार की सीधी मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे हैं। शासन-प्रशासन की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 12 जून 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) गोहपारू को मामले की जांच कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद महीनों बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। रिपोर्ट दबाने के इस रवैये से साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदार अधिकारी दोषियों को संरक्षण देने में जुटे हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 57 के टेटका मोड़-शहडोल मार्ग निर्माण के लिए यह भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में आने वाली है। यदि इस कूटरचना को समय रहते रोका न गया, तो सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचेगा। जनता अब मांग कर रही है कि फर्जीवाड़ा करने वाले भू-माफिया के साथ-साथ जांच दबाने और आरोपियों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी तत्काल सख्त नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।

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