सोहागपुर टोली द्वारा जुलूस में फहराया गया संदेहास्पद झंडा जब्त,अभियोजन अधिकारी की सलाह के बाद पुलिस सख्त, जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। शहर में मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान सामने आई एक घटना ने पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक सतर्कता और आम जनता की निष्ठा के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोहागपुर से आए जुलूस की एक टोली द्वारा तीन रंग के झंडे पर उर्दू भाषा में इबादत और कलमा लिखकर लहराने का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, स्थानीय नागरिकों और राष्ट्रप्रेमी संस्थाओं ने इस पर तीखी आपत्ति जताई। राष्ट्रीय ध्वज के प्रतीकों के अनुचित उपयोग और अवमानना की आशंका को लेकर आम जनता में भारी जनाक्रोश देखने को मिला, जिसके बाद नागरिकों ने प्रशासन से निष्पक्ष व कठोर कार्रवाई की मांग की। जनता की जागरूक सतर्कता और बढ़ते दबाव के चलते कोतवाली पुलिस ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और विवादित झंडे को अपने कब्जे में लेकर जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक संजय कुमार अग्रवाल ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया है। प्राथमिक पड़ताल के बाद मामले को विधिक सलाह के लिए अभियोजन अधिकारी (Prosecution Officer) के समक्ष भेजा गया, जिन्होंने स्पष्ट किया कि लहराया गया झंडा राष्ट्रध्वज तिरंगे की वैधानिक श्रेणी और तय मानकों के अंतर्गत नहीं आता है। हालांकि, घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि इतने बड़े आयोजन और जुलूस के दौरान संबंधित जिम्मेदार प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी मौके पर क्या कर रहे थे? जनता का साफ तौर पर मानना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रतीकों की मर्यादा सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। फिलहाल, जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन मामले की गहराई से विवेचना कर रहा है और दोषी तत्वों पर सख्त वैधानिक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है।
