सुविधाजनक, जनोन्मुखी एवं सुलभ प्रशासन के लिए प्रशासनिक इकाइयों के सृजन एवं विलोपन के प्रस्ताव दें,अध्यक्ष परिसीमन आयोग

पद महत्वपूर्ण नहीं होता, महत्वपूर्ण होता है कार्य,सचिव परिसीमन आयोग 


Junaid Khan - शहडोल। 19 अगस्त 2026- मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के संबंध में कलेक्टर कार्यालय के विराट सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की भौगोलिक परिस्थितियों, जनसंख्या, क्षेत्रफल तथा आमजन को सुविधाजनक, जनोन्मुखी एवं सुलभ प्रशासन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रशासनिक इकाइयों के सृजन, पुनर्गठन, युक्तियुक्तकरण एवं विलोपन से संबंधित प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मध्यप्रदेश प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व एसीएस श्री एस.एन. मिश्रा ने कहा कि जिले की भौगोलिक परिस्थितियों, जनसंख्या, क्षेत्रफल तथा जन अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक इकाइयों के सृजन एवं विलोपन के प्रस्ताव निर्धारित प्रपत्र में कारण सहित कलेक्टर के माध्यम से परिसीमन आयोग को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य प्रदेश में अधिक सुविधाजनक, जनोन्मुखी एवं सुलभ प्रशासन सुनिश्चित करना है। अध्यक्ष श्री मिश्रा ने जन अपेक्षाओं के आधार पर वर्तमान संभाग, जिला, तहसील एवं जनपद विकासखंड जैसी प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने भविष्य में नवीन प्रशासनिक इकाइयों के गठन के लिए मार्गदर्शी सिद्धांतों, प्रशासनिक इकाइयों की पद संरचना, उनके आकार एवं कार्यों के अनुपात में पदों की आवश्यकता तथा पदीय संरचना के युक्तियुक्तकरण के संबंध में सुझाव एवं जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रशासनिक इकाइयों की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न पदों के लिए आवश्यक कौशल एवं स्किल के संबंध में भी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। पद महत्वपूर्ण नहीं, कार्य महत्वपूर्ण,अक्षय कुमार सिंह। मध्यप्रदेश प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग के सचिव श्री अक्षय कुमार सिंह ने बताया कि आयोग द्वारा प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के संबंध में संबंधित संभाग एवं जिलों का भ्रमण कर सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं। वर्तमान में कार्यरत प्रशासनिक इकाइयों के संबंध में प्रश्नावली भी तैयार की गई है, जिसके माध्यम से आवश्यक जानकारी एवं सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।श्री सिंह ने कहा कि शासकीय सेवकों की मेहनत से ही शासन की योजनाओं एवं नीतियों को प्रभावी रूप से अंतिम छोर तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “पद महत्वपूर्ण नहीं होता, महत्वपूर्ण होता है आपके द्वारा किया गया कार्य।” उन्होंने सभी शासकीय सेवकों से शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की सलाह भी दी। वेब पोर्टल के माध्यम से दे सकते हैं सुझाव। बैठक में प्रश्नावली के संबंध में कलेक्टर एवं उनके अधीनस्थ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श तथा कलेक्टर के माध्यम से प्रश्नावली प्रेषित किए जाने के उपरांत आयोग द्वारा उसकी समीक्षा किए जाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि आयोग द्वारा निर्धारित प्रश्नावली वेब पोर्टल के माध्यम से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई गई है। कोई भी व्यक्ति, संस्था, समिति अथवा जनप्रतिनिधि यदि किसी प्रशासनिक इकाई के युक्तियुक्तकरण, विलोपन अथवा नवीन प्रशासनिक इकाई के सृजन के संबंध में सुझाव अथवा प्रस्ताव देना चाहता है, तो आयोग द्वारा निर्धारित प्रश्नावली के अनुरूप अपना प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है। प्राप्त प्रस्तावों की आयोग स्तर पर समीक्षा की जाएगी। कलेक्टर कार्यालय को किसी संस्था, समिति अथवा जनप्रतिनिधि से प्राप्त सुझाव एवं प्रस्तावों की प्राथमिक जांच कर उन्हें आयोग द्वारा निर्धारित प्रश्नावली के अनुरूप पूर्ण कराने तथा आवश्यक अभिमत के साथ आयोग को प्रेषित करने के संबंध में भी जानकारी दी गई। प्राप्त प्रस्तावों एवं सुझावों की समीक्षा के उपरांत आयोग द्वारा विभिन्न निर्धारित मापदंडों एवं कारकों के आधार पर अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत की जाएंगी। विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर हुआ विचार-विमर्श। बैठक में आयोग की कार्यप्रणाली, कार्यक्षेत्र, लक्ष्य, टर्म्स ऑफ रेफरेंस-1 के अंतर्गत अपनाए जाने वाले चरण, प्रश्नावली भाग-1, प्रस्तावित प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन, युक्तियुक्तकरण एवं विलोपन, प्रस्तावित इकाइयों की सीमाएं, प्रस्तावित मुख्यालय का विवरण, कलेक्टरों से अपेक्षाएं तथा टर्म्स ऑफ रेफरेंस-3 सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल, अपर कलेक्टर श्री सरोधन सिंह, एसडीएम सोहागपुर श्रीमती अमृता गर्ग सहित विभिन्न विभागों के जिला प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे।

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