अव्यवस्थाओं के फेर में फंसा पंच सम्मेलन,मंच से उठी असंतोष की चिंगारी,कलेक्टर तक पहुंची जनप्रतिनिधियों की हुंकार

विधायक के तेवरों ने खोला कुप्रबंधन का कच्चा चिट्ठा, प्रशासन की साख पर उठे गंभीर सवाल


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल के जिला स्तरीय पंच सम्मेलन में प्रशासनिक दूरदर्शिता और जमीनी तैयारियों का जो रूप सामने आया, उसने न केवल सरकारी आयोजनों के खोखले दावों की कलई खोलकर रख दी है, बल्कि पूरे प्रशासनिक महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 17 अगस्त को जनपद पंचायत सोहागपुर में ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण’ के तहत प्रशिक्षण एवं जिला स्तरीय पंच सम्मेलन का ढांचा तो तैयार किया गया, लेकिन आयोजन स्थल पर कुप्रबंधन का आलम यह रहा कि क्षेत्रीय प्रतिनिधियों का सम्मान दरकिनार नजर आया। जयसिंहनगर विधायक मनीषा सिंह के तेवरों ने इस अव्यवस्था पर पहला कड़ा प्रहार किया। बैठक व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं में घोर उपेक्षा से आहत होकर जब विधायक कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलीं, तो उनका यह कदम सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का केंद्र बन गया। इस घटनाक्रम का वायरल वीडियो अब सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही, समन्वय की कमी और अक्षमता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। जनप्रतिनिधियों की लामबंदी और कलेक्टर की कमान विधायक के बाहर निकलते ही सम्मेलन स्थल पर मौजूद सरपंच, उपसरपंच, पंच और जनपद सदस्यों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया। खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के इन जनसेवकों ने एकसुर में कार्यक्रम का पूर्ण बहिष्कार कर दिया। सभी एकजुट होकर सीधे कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और वहां जमकर अपना विरोध दर्ज कराया। जन प्रतिनिधियों के इस उग्र रुख और मामले के तूल पकड़ते ही कलेक्ट्रेट में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए कलेक्टर पार्थ जायसवाल को स्वयं कमान संभालनी पड़ी। उन्होंने नाराज जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधिमंडल से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी शिकायतों को सुना और आयोजन की कमियों को स्वीकारते हुए भविष्य में सुधार का भरोसा दिलाया। हालांकि, आक्रोशित जनप्रतिनिधियों ने दोटूक मांग रखी है कि इस जिला स्तरीय पंच सम्मेलन को निरस्त कर दोबारा पूरी गरिमा, मर्यादा और सुनियोजित व्यवस्थाओं के साथ आयोजित किया जाए। जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान इस पूरे घटनाक्रम ने जिले के आला अधिकारियों, जनपद पंचायत सोहागपुर के प्रशासनिक अमले और आयोजन की जिम्मेदारी संभालने वाले नोडल अधिकारियों की कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर लपेटे में ले लिया है। करोड़ों के बजट और कागजी योजनाओं का ढिंढोरा पीटने वाले संबंधित जिम्मेदार अधिकारी आखिर इतने बड़े जिला स्तरीय आयोजन के लिए बैठने, पेयजल और सम्मानजनक प्रोटोकॉल जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में विफल कैसे रहे? सरकार की मंशा के विपरीत ज़मीनी स्तर पर कार्यरत प्रतिनिधियों के साथ हुआ यह व्यवहार न केवल प्रशासनिक शिथिलता का प्रतीक है, बल्कि उन अधिकारियों की लापरवाही को भी उजागर करता है जो केवल औपचारिकता पूरी करने में लगे रहते हैं। अब यह मामला पूरे जिले में सरकार और स्थानीय प्रशासन की साख से जुड़ गया है, जहां जनता और जनप्रतिनिधि दोनों ही इस लापरवाही के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

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