शासकीय हाई स्कूल धुरवार का शर्मनाक कारनामा लेट फीस के नाम पर प्राचार्य जीतेंद्र पटेल पर लगा दस हजार मांगने का आरोप

शासकीय हाई स्कूल धुरवार का शर्मनाक कारनामा लेट फीस के नाम पर प्राचार्य जीतेंद्र पटेल पर लगा दस हजार मांगने का आरोप 



Junaid Khan - शहडोल। शहडोल एक तरफ प्रदेश सरकार 'सब पढ़ें, सब बढ़ें' का ढिंढोरा पीटते नहीं थकती, वहीं दूसरी तरफ सोहागपुर विकास खंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के मंदिर को वसूली का अड्डा बना दिया गया है। मामला विकास खंड सोहागपुर अंतर्गत आने वाले शासकीय हाई स्कूल धुरवार का है, जहां कक्षा 11वीं में दाखिला लेने पहुंचे एक गरीब छात्र से प्राचार्य द्वारा खुलेआम दस हजार की रिश्वत मांगी गई। रिश्वत की रकम न चुका पाने पर छात्र को एडमिशन देने से साफ मना कर दिया गया। छात्र ने अपनी पढ़ाई बचाने के लिए कमिश्नर, कलेक्टर और CM हेल्पलाइन तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण आज भी छात्र दाखिले के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

क्या है पूरा मामला 

ग्राम हरदी77 का निवासी छात्र आजाद यादव पिता रामावतार यादव शासकीय हाई स्कूल धुरवार में कक्षा 11वीं में एडमिशन लेने के लिए गया था पीड़ित छात्र का आरोप है कि स्कूल के प्राचार्य जीतेंद्र पटेल ने लेट एडमिशन और नियमों का भय दिखाकर प्रवेश देने के बदले दस हजार की रिश्वत (कमीशन) की मांग रखी गई। जब छात्र और उसके माता ने अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए यह अवैध राशि देने में असमर्थता जताई, तो प्राचार्य ने अड़ियल रवैया अपनाते हुए उसका एडमिशन करने से स्पष्ट इंकार कर दिया और उसे स्कूल से भगा दिया।

कमिश्नर की जनसुनवाई से लेकर CM हेल्पलाइन तक गुहार

प्राचार्य की इस खुली तानाशाही और रिश्वतखोरी से तंग आकर पीड़ित छात्र आजाद यादव ने प्रशासनिक अधिकारियों की शरण ली: शहडोल कमिश्नर जनसुनवाई छात्र ने मंगलवार को संभाग स्तरीय जनसुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कमिश्नर महोदय को लिखित शिकायत सौंपी और आपबीती सुनाई। कलेक्टर कार्यालय जिले के मुखिया कलेक्टर के समक्ष भी पूरे मामले का शिकायती आवेदन देकर दोषी प्राचार्य पर दंडात्मक कार्रवाई और एडमिशन दिलाने की मांग की गई। शिकायतों का पुलिंदा तैयार, फिर भी बेखौफ प्रिंसिपल। हैरानी की बात यह है कि संभाग के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी (कमिश्नर), जिले के कलेक्टर और राज्य सरकार की CM हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज होने के बावजूद अभी तक छात्र का एडमिशन नहीं हो सका है। प्रशासनिक तंत्र की इस लाचारी या अनदेखी के चलते दोषी प्राचार्य जीतेंद्र पटेल के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे बिना किसी डर के अपने पद पर बने हुए हैं। कमिश्नर और कलेक्टर की चौखट तक पहुंचने के बाद भी यदि एक छात्र को उसका संवैधानिक अधिकार (शिक्षा) नहीं मिल पा रहा है, तो आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था से भरोसा उठना तय है। 1,शिक्षा विभाग की चुप्पी: क्या जिला शिक्षा आधकारी और स्थानीय प्रशासन को प्राचार्य की इस तानाशाही की जानकारी नहीं है, या फिर इस कमीशनखोरी में सबकी मौन सहमति है? 2.CM हेल्पलाइन का खोखला दावा: जिस शिकायत निवारण प्रणाली का प्रचार-प्रसार जोर-शोर से किया जाता है, वह एक छात्र को एडमिशन दिलाने में नाकाम क्यों साबित हो रही है? 3.साल बर्बाद होने की जिम्मेदारी किसकी ?: एडमिशन की तय समय-सीमा बीतने के कारण आजाद यादव का जो शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो रहा है, उसकी भरपाई कौन करेगा? कड़ी कार्रवाई और तत्काल दाखिले की उठी मांग क्षेत्रीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों औरभ छात्र संगठनों ने इस भ्रष्ट रवैये पर भारी रोष व्यक्त किया है। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि रिश्वतखोर प्राचार्य जीतेंद्र पटेल को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए और छात्र आजाद यादव का कक्षा 11वीं में बिना किसी विलंब के एडमिशन कराया जाए। यदि जल्द ही प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाया, तो उग्र आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी दी गई है।

Previous Post Next Post