थोड्हा के पास दो बाइकों की आमने-सामने की भिड़ंत, स्थानीय लोगों ने दिखाई इंसानियत, शासन-प्रशासन से मुआवजा और त्वरित सहायता की गुहार
Junaid Khan - शहडोल। अनुपपुर कोतमा स्नेहा और आत्मीयता का पवित्र पर्व रक्षाबंधन उस वक्त गहरे मातम में बदल गया, जब थाना क्षेत्र के थोड्हा गांव के समीप दो दुपहिया वाहनों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे की विभीषिका इतनी भयानक थी कि दोनों वाहनों के चालकों की मौके पर ही सांसें थम गईं, जबकि एक महिला और उसका मासूम बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गए। मिली जानकारी के अनुसार जमनिहा निवासी रोशनी केवट (25) अपने पति मनोज केवट और दो बेटों मयंक (10) व सत्यम (7) के साथ बेलियाबड़ी में राखी बांधने के बाद मायके छतई जाने के लिए निकले थे। इसी दौरान सामने से अपनी बहन से राखी बंधवाकर अपने गांव रेडुला लौट रहे बाइक सवार मान सिंह (34, निवासी रेडुला) की बाइक से उनकी भीषण टक्कर हो गई। टक्कर लगते ही चीख-पुकार मच गई और त्यौहार का उल्लास पल भर में चीत्कार में बदल गया।
ग्रामीणों ने पेश की इंसानियत की मिसाल,अस्पताल पहुंचाया
दुर्घटना के तुरंत बाद घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय लोगों और राहगीरों ने बिना समय गंवाए संवेदनशीलता और अदम्य साहस का परिचय दिया। ग्रामीणों ने मुस्तैदी दिखाते हुए लहुलूहान पड़े पीड़ितों को संभाला और निजी साधनों की मदद से तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने परीक्षण के उपरांत मनोज केवट और मान सिंह को मृत घोषित कर दिया। वहीं सिर व चेहरे पर गंभीर चोटों से जूझ रही रोशनी केवट और सिर में गंभीर सूजन से पीड़ित मासूम सत्यम को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। स्थानीय नागरिकों का यह समय पर किया गया प्रयास इंसानियत की बड़ी मिसाल बना, जिससे समय रहते घायलों को चिकित्सीय आपात सुविधा मिल सकी।
प्रशासनिक दखल और मुआवजे की उठी मांग
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, पर्व के दिन दो परिवारों के चिराग बुझ जाने और मासूम बच्चों के अनाथ हो जाने से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। क्षेत्रीय जनसमुदाय और प्रबुद्ध जनों ने जिले के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों एवं प्रदेश सरकार का ध्यान इस दुखद त्रासदी की ओर आकृष्ट कराया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पीड़ित परिवारों की दयनीय स्थिति को देखते हुए शासन-प्रशासन तत्काल मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान अथवा पीड़ित राहत कोष से आर्थिक सहायता और घायलों के नि:शुल्क समुचित इलाज की व्यवस्था करे। साथ ही, ब्लैक स्पॉट बनते जा रहे दुर्घटना संभावित मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस व सड़क निर्माण एजेंसी को गति सीमा और सुरक्षा मानकों के सख्त पालन के निर्देश देने की भी आवश्यकता जताई गई है।
