परमिट का खेल,जिम्मेदार पस्त,दूसरे राज्य की सीमा लांघकर दौड़ रहीं बसें, शासन-प्रशासन मौन

खोड़री के सजग नागरिक ने पुलिस अधीक्षक से की शिकायत, परिवहन विभाग और क्षेत्रीय अमले की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल 


Junaid Khan - शहडोल। जिले में यात्री बसों के नियम-विरुद्ध संचालन और परिवहन माफिया की मनमानी पर अब क्षेत्रीय जनता की सजगता भारी पड़ने लगी है। जैतपुर क्षेत्र में स्वीकृत परमिट और निर्धारित रूट को दरकिनार कर दूसरे राज्य की सीमाओं को पार करते हुए मध्य प्रदेश की सीमा में अवैध रूप से यात्री बसें दौड़ाए जाने का बड़ा मामला उजागर हुआ है। परिवहन नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाती इन बसों और संबंधित बस संचालकों की इस अराजकता पर खोड़री निवासी सजग नागरिक संजय कुमार त्रिपाठी ने हिम्मत दिखाते हुए सीधे पुलिस अधीक्षक (एसपी) के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध संचालन पर तत्काल रोक लगाने, परमिट रद्द करने और जिम्मेदार वाहन मालिकों तथा विभागीय लापरवाही पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। जनता द्वारा उजागर किए गए इस मामले से परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली कटघरे में खड़ी हो गई है। आवेदन में उजागर किए गए तथ्यों के अनुसार, बस क्रमांक MP 17 P 3168 का स्वीकृत मार्ग अनूपपुर से कौड़ी वाया पसान, फुंगा, केशवाही, जैतपुर और साखी निर्धारित है। इसके बावजूद यह बस अपने तय रूट को छोड़कर छत्तीसगढ़ के कुम्हारपुर क्षेत्र से होकर मध्य प्रदेश में प्रवेश कर रही है और शाहडोल जिले की सीमा में बेधड़क संचालित हो रही है। स्वीकृत परमिट मार्ग से हटकर यह बस रोजाना लगभग 40 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तक अवैध रूप से चलाई जा रही है। इसी प्रकार, छत्तीसगढ़ में पंजीकृत दूसरी बस CG 31 C 2997, जिसका परमिट मार्ग पेंड्रा से जनकपुर वाया झगराखंड, मनेंद्रगढ़, केल्हारी और वैरसिया तक निर्धारित है, वह भी अपनी तय सीमा लांघकर मध्य प्रदेश में प्रवेश कर रही है और जैतपुर से झिकबिजुरी मार्ग पर यात्रियों को ढो रही है। सवाल उठना लाजिमी है कि अंतरप्रांतीय सीमाओं पर तैनात आरटीओ जांच चौकियों और स्थानीय पुलिस की नजरों से बचकर महीनों से यह खेल आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है? मामला सिर्फ परमिट शर्तों के उल्लंघन और सीमा पार अवैध परिवहन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और दबंगई से भी जुड़ा हुआ है। शिकायत में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि इन बसों के चालकों और परिचालकों का व्यवहार यात्रियों और अन्य वाहन चालकों के प्रति बेहद अभद्र और हिंसक रहता है। सड़कों पर तेज रफ्तार से ओवरटेक कर दुर्घटनाओं को न्योता देना, विरोध करने पर गाली-गलौज करना और मारपीट व विवाद की स्थिति पैदा करना इनकी दिनचर्या बन चुकी है। हद तो तब हो गई जब वैध परमिटधारकों द्वारा नियम पालन की बात कहे जाने पर उन्हें सीधे धमकियां तक दी जा रही हैं। जागरूक नागरिकों द्वारा पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए दस्तावेजों, परमिट प्रतियों और जमीनी हकीकत ने अब गेंद प्रशासन के पाले में डाल दी है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कर कठोर वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकारी तंत्र जनता की सुरक्षा के बजाय नियमों की बलि चढ़ाने वालों के आगे घुटने टेक चुका है। फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें पुलिस अधीक्षक और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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