कलेक्ट्रेट पर अनशन,रसूखदारों के सिंडिकेट और भ्रष्ट राजस्व तंत्र पर फूटा जनता का आक्रोश

पट्टे की जमीनों पर चला बुलडोजर, विरोध पर फर्जी मुकदमे,प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी पर उठे तीखे सवाल


Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय शहडोल में भू-माफियाओं के सुनियोजित सिंडिकेट और भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र के नापाक गठजोड़ के खिलाफ पीड़ित जनता का सब्र अब सड़कों पर बह निकला है। अपनी खून-पसीने की कमाई और वैध पट्टे की जमीन को दबंगों के हाथों छिनते देख बेबस नागरिक कलेक्ट्रेट के सामने 15 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हुए हैं। पीड़ितों का यह अडिग साहस इस बात की मिसाल है कि जब व्यवस्था अंधी हो जाए, तो जनता अपने हक की लड़ाई के लिए किस कदर लामबंद हो सकती है। धरने पर बैठे पीड़ितों ने सीधे तौर पर दधिवल कॉलोनी निवासी मिश्रा बंधुओं—दुर्गेश उर्फ बबलू मिश्रा, सत्यप्रकाश मिश्रा, राजेश मिश्रा और उनके सिंडिकेट पर अवैध कॉलोनाइजरों व पेट्रोल पंपों की आड़ में गरीबों की जमीनें हड़पने और विरोध करने पर सरकारी ताकत के दम पर झूठे मुकदमों में फंसाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों द्वारा सौंपे गए साक्ष्यों के अनुसार, इस पूरे खेल में सोहागपुर तहसील, एसडीएम कार्यालय से लेकर मैदानी स्तर तक के पटवारी व आरआई की संदेहास्पद भूमिका सामने आ रही है। आरोप है कि हल्का पटवारी प्रेम कुमार मिश्रा, पटवारी विजय विश्वकर्मा, आरआई ललित धार्वे और भरत सोनी जैसे कारिंदों की मिलीभगत से शासकीय और निजी जमीनों के तरमीम व सीमांकन रिकॉर्ड में सुनियोजित हेरफेर किया जाता है। कंप्यूटर रिकॉर्ड में मनमानी प्रविष्टियां दर्ज कर आपत्ति जताने वाले वास्तविक भू-स्वामियों पर ही समझौते का दबाव बनाया जाता है। सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के दावों को धता बताते हुए स्थानीय राजस्व महकमा भू-माफियाओं का ढाल बनकर काम कर रहा है, जिससे आम जनता में शासन-प्रशासन के प्रति भारी असंतोष पनप रहा है। प्रशासनिक तानाशाही और सिंडिकेट के आतंक की बानगी बलपुरवा और नरसहा ग्राम के मामलों में साफ देखी जा सकती है। बलपुरवा (वार्ड 25) निवासी केशव प्रसाद चौधरी की 16 डिसमिल पट्टे की भूमि (खसरा नंबर 183) पर बने दो पक्के कमरों, किचन और सीढ़ियों को जेसीबी से जमींदोज कर 10 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। विरोध करने पर पीड़ितों को जातिसूचक गालियां, जान से मारने की धमकी और एट्रोसिटी एक्ट में फंसाने का षड्यंत्र रचा गया। वहीं ग्राम नरसहा (हल्का 78) में पीड़ित नर्मदा प्रसाद यादव और सुभाष यादव की निजी जमीन (खसरा 67/2 व 67/3) पर बिना अनुमति ठेकेदार संजय ताम्रकार, मनोज जैसीहानी (शम्मू), सुधीर सिंह, सीमा त्रिपाठी और मिश्रा बंधुओं द्वारा 33 केवी विद्युत लाइन के 3 पोल जबरन खड़े कर दिए गए। शासकीय आराजी को बचाने और निजी संपत्ति पर जबरन कब्जे का विरोध करने पर उल्टे पीड़ितों पर ही भादवि की धारा 427, 294, 506, 34 सहित फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर उनका मुख्य रास्ता बंद कर दिया गया। लगातार बढ़ते जनाक्रोश के बीच अब सामाजिक व राजनीतिक संगठन भी इस आर-पार की लड़ाई में पीड़ितों के समर्थन में आ गए हैं। शिवसेना के जिला संयोजक शैलेंद्र कुमार मौर्य एवं मूलनिवासी संघ ने मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई और भू-माफियाओं की सार्वजनिक सूची जारी करने की मांग की है। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर भ्रष्ट राजस्व अमले और मिश्रा बंधुओं के वित्तीय व राजस्व रिकॉर्ड की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कर न्याय नहीं दिलाया गया, तो पूरे कलेक्ट्रेट का पूर्ण घेराव कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन अपने भ्रष्ट तंत्र पर चाबुक चलाकर पीड़ितों को न्याय दिला पाता है या फिर यह सिंडिकेट फाइलों की धूल में दफन होकर रह जाएगा।

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