भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा स्टॉप डैम,पहली ही बारिश में बही लाखों की संरचना, जनप्रतिनिधि मौन व अफसर बेपरवाह

ग्राम छूदा के खुड़सेड़ा नाले पर घटिया निर्माण की खुली पोल, लीपापोती में जुटा प्रशासन, आक्रोशित ग्रामीणों ने उठाई उच्चस्तरीय जांच और एफआईआर की मांग 


Junaid Khan - शहडोल। जयसिंहनगर विकास के नाम पर सरकारी खजाने की किस तरह दिन-दहाड़े लूट मचाई जा रही है, इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण जयसिंहनगर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत छूदा में देखने को मिला है। यहाँ खुड़सेड़ा नाले पर लाखों रुपए की लागत से किसानों को सिंचाई सुविधा देने के नाम पर निर्मित कराया जा रहा स्टॉप डैम मानसून की पहली ही तेज बारिश का थपेड़ा तक नहीं झेल सका और ताश के पत्तों की तरह ढह गया। महज कुछ महीने पहले पंचायत एवं निर्माण एजेंसी के विभागीय संरक्षण में खड़ा किया गया यह ढांचा पानी के तेज बहाव में बह गया, जिसने सरकारी दावों और भ्रष्टाचार के गठजोड़ की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। इस विनाशलीला को देखकर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। जागरूक ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री, बिना मानक के सीमेंट-रेत का मिश्रण और तकनीकी नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई। ग्रामीणों का कहना है कि अफसरों की शह पर जनता के टैक्स के पैसे को पानी में बहा दिया गया है और अब लीपापोती का खेल शुरू हो चुका है।

जिम्मेदार अफसरों की सरपरस्ती और जनप्रतिनिधियों की आपराधिक चुप्पी 

इस पूरे फर्जीवाड़े में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायक, सांसद और जिम्मेदार मंत्रियों की भूमिका को लेकर खड़ा हो रहा है। चुनाव के समय ग्रामीण विकास और किसानों की आय दोगुनी करने के लंबे-चौड़े वादे करने वाले जन प्रतिनिधि आज इस खुले भ्रष्टाचार पर आंखें मूंदे बैठे हैं। नाले पर बना स्टॉप डैम ढह जाने से जहाँ एक ओर लाखों रुपए का सरकारी बजट नाले में बह गया, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के दर्जनों किसानों का भविष्य और सिंचाई की उम्मीदें भी जमींदोज हो गईं। जनपद पंचायत जयसिंहनगर के जिम्मेदार अधिकारियों की देखरेख में चल रहे इस कार्य में तकनीकी इंजीनियरों और ठेकेदारों की मिलीभगत साफ नजर आ रही है। सूत्रों की मानें तो निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच कमीशनखोरी का यह खेल लंबे समय से चल रहा है, जिसके कारण घटिया गुणवत्ता वाले निर्माण कार्यों को भी आंख बंद करके हरी झंडी दे दी जाती है। जब तक ऐसी आपदाएं सामने नहीं आतीं, तब तक साहबान एसी कमरों से बाहर निकलने की जहमत तक नहीं उठाते।

रटारटाया जवाब और जनता का अल्टीमेटम (जांच की मांग) 

हमेशा की तरह मामला उजागर होने के बाद प्रशासनिक अमला अपने बचाव में खोखली दलीलें देने लगा है। जयसिंहनगर जनपद की सीईओ शिवानी जैन का कहना है कि "बारिश में पानी के तेज बहाव से स्टॉप डैम का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है, कार्य अभी निर्माणाधीन है और एक रुपए का भुगतान नहीं किया गया है, इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।" लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर भुगतान नहीं हुआ, तो क्या गुणवत्ता से खिलवाड़ करने की छूट मिल जाती है? पहली ही बारिश में संरचना का ध्वस्त होना साफ दर्शाता है कि प्राकलन (एस्टिमेट) के अनुसार काम हुआ ही नहीं था। क्षेत्र की पीड़ित और आक्रोशित जनता ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल जांच के कागजी घोड़ों तक बात सीमित न रहे, बल्कि इस घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार जनपद के तकनीकी अधिकारियों, उप-यंत्री, सचिव एवं निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जाए और उनसे सरकारी धन की वसूली की जाए। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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