अमरकंटक, सारनाथ और उत्कल एक्सप्रेस में लंबी वेटिंग से जनता बेहाल,स्पेशल ट्रेनों पर रेल प्रशासन मौन, क्या अफसरों की सरपरस्ती में चल रहा टिकटों का फर्जीवाड़ा?
Junaid Khan - शहडोल। भाई-बहन के पवित्र पर्व रक्षाबंधन के नजदीक आते ही शहडोल संभाग और आसपास के रेल यात्रियों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। शहडोल रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली प्रमुख ट्रेनों में यात्रियों का दबाव इस कदर बढ़ गया है कि कन्फर्म सीट पाना तो दूर, वेटिंग टिकट मिलना भी दूभर हो गया है। शहडोल से बिलासपुर, रायपुर, इंदौर, भोपाल और दुर्ग समेत अन्य बड़े शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनों में आगामी 10 दिनों तक लंबी वेटिंग लिस्ट बनी हुई है। सारनाथ एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस, अमरकंटक एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति और नर्मदा एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में 26 अगस्त से 5 सितंबर के बीच वेटिंग का आंकड़ा 100 से 375 तक पहुँच चुका है। इसके बावजूद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और स्थानीय रेल प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है। न तो अतिरिक्त कोच जोड़ने की कोई ठोस योजना बनाई गई है और न ही रक्षाबंधन विशेष ट्रेनों का ऐलान किया गया है। रेल प्रशासन की इस घोर लापरवाही और लाचारी के कारण आम जनता बिलासपुर, भोपाल और इंदौर की यात्रा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
रेलवे अफसरों की साठगांठ से दलालों की चाँदी, 1000 का टिकट 3000 में नीलाम
रेलवे की इस चरमराती व्यवस्था और टिकट काउंटरों की दुर्दशा का पूरा फायदा ऑनलाइन टिकट दुकानदारों, एजेंटों और दलालों का गिरोह उठा रहा है। स्टेशन के काउंटर पर आम यात्री घंटों लाइन में खड़े रहकर खाली हाथ लौट रहे हैं, वहीं ऑनलाइन सेंटरों और निजी एजेंटों के पास तत्काल और कन्फर्म टिकटों की कोई कमी नहीं है। आरोप है कि ₹1000 के सामान्य यात्रा टिकट के बदले असहाय यात्रियों से ₹2500 से ₹3000 तक ऐंठे जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि इस पूरे काले कारोबार में केवल बाहरी दलाल ही शामिल नहीं हैं, बल्कि रेलवे के उच्च स्तर पर बैठे अधिकारियों और वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों का भी एक बड़ा हिस्सा इस कमीशनखोरी में शामिल है। सॉफ्टवेयर के खेल और रेलवे आरक्षण प्रणाली में सेंधमारी कर आम यात्रियों के अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है। पर्व के मौके पर अपने घर पहुँचने की मजबूरी का फायदा उठाकर जनता की जेब पर खुलेआम डकैती डाली जा रही है और जिम्मेदार प्रशासन आँखें मूंदे बैठा है।
अतिरिक्त ट्रेनों पर सन्नाटा, जनता ने उठाई उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच और कार्रवाई की माँग
एक तरफ जहाँ नौकरीपेशा, मजदूर और व्यापारी वर्ग त्यौहार मनाने अपने घर लौटने के लिए वैकल्पिक साधनों की तलाश में भटक रहा है, वहीं रेल विभाग की सुस्ती यह साबित करती है कि उसे जनसुविधाओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की ओर से अब तक कोई अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन चलाने की आधिकारिक घोषणा न होना प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता सबूत है। क्षेत्र की पीड़ित जनता और यात्री संगठनों ने अब सरकार और रेल मंत्रालय के उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की माँग की है। जनता का स्पष्ट कहना है कि रेलवे में सक्रिय इस टिकट कालाबाजारी सिंडिकेट, दलालों और उनके साथ साँठगाँठ रखने वाले रेल अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस और सीबीआई (CBI) स्तर की निष्पक्ष जाँच बिठाई जाए। अवैध मुनाफाखोरी करने वाले ऑनलाइन सेंटरों पर छापेमारी कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि त्यौहार के इस सीजन में आम जनता को वाजिब दाम पर सुगम यात्रा का अधिकार मिल सके।
