लापरवाह कार्यपालन यंत्री की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल,कलेक्टर चौखट पर दस्तक देकर नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षदों ने बुलंद की जनता की आवाज
Junaid Khan - शहडोल। जब शासन-प्रशासन का पूरा तंत्र कागजी औपचारिकताओं में उलझ जाए और जिम्मेदार अफसर अपनी फाइलों पर कुंभकर्णी नींद सो जाएं, तो फिर जनहित और विकास की गाड़ी का पटरी से उतरना तय हो जाता है। शहडोल शहर को संवारने, जर्जर सड़कों के गड्ढे भरने, नालियां दुरुस्त करने और विभिन्न वार्डों में पेवर ब्लॉक बिछाने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्तावित कार्य आजकल कार्यपालन यंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास (शहडोल संभाग) के दफ्तर में धूल फांक रहे हैं। आलम यह है कि महीनों बीत जाने के बावजूद इन जनहित के कामों को तकनीकी स्वीकृति (टी.एस.) की हरी झंडी नसीब नहीं हो सकी है। अफसरों की इस बेरुखी और अड़ियल ढर्रे से आजिज आकर आखिरकार जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाते हुए नगर पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और समस्त पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया। जनता की सुध लेते हुए जनप्रतिनिधि ब्रिगेड सीधे कलेक्टर शहडोल के दरबार में जनसुनवाई के दौरान पहुंची और प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ जोरदार दस्तक दी। शहडोल के विभिन्न वार्डों में बदहाल सड़कों, बजी बजाती नालियों और ठप पड़े निर्माण कार्यों से आम जनता हर दिन भारी परेशानियों का सामना कर रही है। सड़कों पर हिचकोले खाती जनता के दर्द को समझते हुए नगर पालिका परिषद की ओर से वार्डों के कायाकल्प के लिए बाकायदा प्रस्ताव तैयार कर तकनीकी स्वीकृति हेतु कार्यपालन यंत्री के पास भेजे गए थे। लेकिन 'साहब' की कलम शायद इतनी भारी हो चुकी है कि स्वीकृतियों पर दस्तखत करने की फुर्सत ही नहीं मिल रही। 25 अगस्त को सौंपे गए आक्रामक शिकायती पत्र में जनप्रतिनिधियों ने साफ आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी की घोर लापरवाही और सुस्त रवैये के चलते पूरे शहडोल शहर का विकास अधर में लटका हुआ है। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों ने कलेक्टर से पुरजोर मांग की है कि कार्यपालन यंत्री को तत्काल निर्देशित कर लंबित टी.एस. पर मोहर लगवाई जाए ताकि विकास कार्य जल्द शुरू हो सकें। नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षदों द्वारा जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ने और प्रशासनिक तानाशाही के सामने शीश न झुकाकर सीधे कलेक्टर के सामने मामला रखने के इस कदम की पूरा शहडोल शहर सराहना कर रहा है। जनहित के लिए सड़कों से लेकर कलेक्ट्रेट तक संघर्ष करने वाले इन जनप्रतिनिधियों ने यह साबित कर दिया है कि जनता का विश्वास ही उनकी असली ताकत है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या कलेक्टर शहडोल के कड़े संज्ञान के बाद फाइलों को दबाकर बैठे कार्यपालन यंत्री की नींद टूटेगी और लापरवाह अफसरों पर गाज गिरेगी? या फिर शहडोल की निर्दोष जनता यूं ही अफसरशाही की नाफरमानी और सुस्त रवैये का खमियाजा भुगतने को मजबूर रहेगी? शासन और उच्च प्रशासन को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि शहर के ठप पड़े विकास को गति मिल सके।
