स्वास्थ्य तंत्र लाचार, विधायक-सांसद मौन,बच्चों की गहन चिकित्सा (PICU) और एम्बुलेंस सेवाओं का घोर अभाव, मूलभूत सुविधाओं के तरस रहे हजारों ग्रामीण
Junaid Khan - शहडोल। जिले के सिंहपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। 156 गांवों की विशाल आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालने वाला यह अस्पताल आज खुद 'वेंटिलेटर' पर नजर आ रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थाई पदस्थापना न होने के कारण गंभीर अवस्था में पहुंचने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बजाय सीधे जिला अस्पताल या उच्च स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर कर दिया जाता है, जिससे मरीजों की जान हमेशा सांसत में फंसी रहती है। प्रशासनिक अनदेखी का आलम यह है कि बीएमओ डॉ. पुष्पेंद्र सिंह की मूल पदस्थापना मझगवां पीएचसी में होने के बावजूद वे सिंहपुर में मेडिकल ऑफिसर के रूप में दोहरी जिम्मेदारी संभालने को मजबूर हैं। हाल ही में डॉ. नंदिनी की नई पदस्थापना जरूर हुई है, लेकिन विशाल जनसांख्यिकी के दबाव के आगे यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरे के समान सिद्ध हो रही है। क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का झांसा देने वाले स्थानीय विधायक, क्षेत्रीय सांसद, सीएमएचओ, सिविल सर्जन और बीएमओ से लेकर पूरा प्रशासनिक अमला इस दुर्दशा पर आंखें मूंदे बैठा है, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। नेटवर्क और बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर भी जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली कटघरे में है। सिंहपुर सीएचसी के अंतर्गत 7 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 62 उप स्वास्थ्य केंद्र आते हैं। खैरहा को छोड़कर बाकी 6 पीएचसी में मेडिकल ऑफिसर पदस्थ हैं तथा 52 उप स्वास्थ्य केंद्रों में सीएचओ कार्यरत हैं, परंतु मुख्य केंद्र सिंहपुर में ही आपातकालीन सुविधाओं का घोर अकाल है। बच्चों के गंभीर इलाज के लिए आवश्यक गहन चिकित्सा इकाई (PICU/बाल गहन चिकित्सा) की सुविधा यहां बिल्कुल नहीं है। एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय है; पूरे क्षेत्र के लिए विधायक निधि से मात्र एक एम्बुलेंस प्राप्त हुई है, जबकि 108 एम्बुलेंस और दो जननी वाहनों के भरोसे 156 गांवों का विशाल भू-भाग टिका हुआ है। सीएमएचओ डॉ. राजेश मिश्रा द्वारा सिरोजा के डॉक्टर को सिंहपुर में संबद्ध करने और जगह मिलते ही भोपाल से बच्चों की यूनिट की स्वीकृति का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि कागजी वादों और अस्थायी व्यवस्थाओं के खेल में आम गरीब जनता का स्वास्थ्य पिस रहा है। प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही यह लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी अब जन-आक्रोश का रूप ले रही है। जब 156 गांवों का नेटवर्क संभालने वाले मुख्य अस्पताल में ही पर्याप्त मेडिकल ऑफिसर, विशेषज्ञ डॉक्टर और सुदृढ़ एम्बुलेंस बेड़ा मौजूद नहीं है, तो उप स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली पर स्वतः ही सवाल उठ खड़े होते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे करने वाले सांसद व विधायक अब जनता की सुध लेने के बजाय चुप्पी साधे बैठे हैं। यदि समय रहते सिंहपुर सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थाई नियुक्ति नहीं की गई, एम्बुलेंसों का बेड़ा नहीं बढ़ाया गया और पीआईसीयू (PICU) वार्ड का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो स्वास्थ विभाग के अधिकारियों, सिविल सर्जन, सीएमएचओ, बीएमओ और लापरवाह जनप्रतिनिधियों के खिलाफ उग्र जन-आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
