पुलिस व शिक्षा विभाग की लचर कार्यशैली पर उठे गंभीर सवा
Junaid Khan - शहडोल। अनूपपुर पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय अमरकंटक एक बार फिर विवादों के घेरे में है, जहां शिक्षा के मंदिर में अनुशासन का जनाजा निकालते हुए कक्षा 10वीं और 11वीं के दो गुट आपस में भिड़ गए। इस हिंसक झड़प में 11 छात्र घायल हो गए हैं, जिन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमरकंटक में भर्ती कराया गया। जहां ड्यूटी डॉक्टर डॉ. जनक सारीवान ने प्राथमिक उपचार कर छुट्टी तो दे दी, लेकिन छात्रों के शरीर पर बने खरोंच के निशान और अंदरूनी दर्द स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों गुटों के बीच बीते कई दिनों से मनमुटाव व तनाव की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन सोए हुए शिक्षकों व विद्यालय प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी। नतीजा यह रहा कि शुक्रवार को यह सुलगती आग खूनी खूनी झड़प में बदल गई।
प्रिंसिपल और पुलिस की साठगांठ या खानापूर्ति? उठ रहे सवाल
घटना के बाद लीपापोती करने के लिए प्राचार्य अर्चना सिंह ने 20 छात्रों को आनन-फानन में निलंबित कर दिया और 6 सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दो दिनों में रिपोर्ट सौंपने का दावा किया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब अमरकंटक थाना प्रभारी पीएस बघेल अपनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे, तो विद्यालय प्रबंधन ने इतने गंभीर मामले में पुलिस को कोई लिखित आवेदन या शिकायत क्यों नहीं दी? क्या विद्यालय की नाकामी को छिपाने के लिए केवल अभिभावकों को बुलाकर समझाइश देने का नाटक किया जा रहा है? पुलिस प्रशासन भी इस मामले में मूकदर्शक बना नजर आ रहा है। कड़े कदम उठाने के बजाय खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। शासकीय तंत्र लाचार, अभिभावकों में भारी आक्रोश। सरकारी योजनाओं व बड़ी-बड़ी बातों का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार और जिला प्रशासन के नाक के नीचे आवासीय विद्यालय में छात्र सुरक्षित नहीं हैं। पिछले कई दिनों से जारी विवाद जब हिंसक रूप ले लेता है, तब जाकर मास्टर और प्रिंसिपल की नींद खुलती है। यदि समय रहते सुरक्षा और अनुशासन पर ध्यान दिया गया होता, तो नौबत मारपीट तक न पहुंचती। वहीं स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस बात को लेकर बेहद आक्रोश है कि आखिर इतनी बड़ी चूक का जिम्मेदार कौन है? जांच के नाम पर निलंबन की कार्रवाई कर मुख्य जिम्मेदारों (प्राचार्य, वार्डन व जिम्मेदार शिक्षकों) को क्यों बचाया जा रहा है? अगर निष्पक्ष जांच के बाद पुलिस ने कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की और दोषियों पर गाज नहीं गिरी, तो यह ढुलमुल रवैया किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है।
