बुढ़ार-अमलाई में निवेश के नाम पर करोड़ों का घपला, ढाई महीने बाद भी बेसुध रहा स्थानीय प्रशासन
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिले के बुढ़ार और अमलाई थाना क्षेत्र में शेयर बाजार और फर्जी निवेश के नाम पर आम जनता और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से करीब साढ़े 4 करोड़ रुपये की ठगी के मामले ने स्थानीय पुलिस प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेसर्स जीएनएस सर्विसेज (फाइनेंशियल सर्विस) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अंजाम दिए गए इस बड़े फर्जीवाड़े में स्थानीय पुलिस की ढिलाई और लापरवाही साफ उजागर हुई है। बुढ़ार थाने में पहली एफआईआर दर्ज हुए ढाई महीने से भी ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस मुख्य आरोपियों को पकड़ने में पूरी तरह नाकाम रही। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस और जिम्मेदार अधिकारियों की सुस्ती और लचर रवैये के कारण ही जालसाज बेखौफ घूमते रहे? कोल इंडिया और एसईसीएल की खदानों से सेवानिवृत्त हुए बुजुर्ग कर्मचारियों ने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई और रिटायरमेंट का पैसा अधिक फायदे के लालच में इस फर्जी कंपनी में लगा दिया था। जब पीड़ित अपनी जमापूंजी गंवाकर थानों के चक्कर काटते रहे, तब स्थानीय अमला महज कागजी टीमें बनाकर हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। एसडीओपी की स्पेशल टीम भी रही पस्त, आखिर उच्च स्तरीय सीआईडी जांच से जगी न्याय की उम्मीद 21 जुलाई को शहडोल एसपी संजय कुमार अग्रवाल द्वारा एसडीओपी बुढ़ार विकास पांडेय के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया था। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि यह विशेष टीम भी दो महीनों तक केवल लकीर पीटती रही और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में नाकाम साबित हुई। बुढ़ार पुलिस की इस नाकामी और ठगी का दायरा अन्य जिलों तक फैले होने के बाद आखिरकार मामला सीआईडी (CID) को सौंपने का प्रस्ताव भेजा गया। अब सीआईडी की जबलपुर ब्रांच ने मामले की जांच संभाल ली है और शहडोल पुलिस ने केस डायरी सीआईडी को सौंप दी है। सीआईडी की एंट्री और इसकी कार्यप्रणाली से अब पीड़ितों में न्याय की उम्मीद जगी है। अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) अपनी निष्पक्ष, गहन और सख्त जांच के लिए जाना जाता है। उम्मीद जताई जा रही है कि सीआईडी की टीम न केवल सुखनंदन यादव, मुकेश यादव, सरोज यादव, विजय पाल और मोहम्मद अमीन जैसे नामजद आरोपियों को दबोचेगी, बल्कि इस रैकेट के पीछे छिपे बड़े मगरमच्छों और शह देने वाले जिम्मेदार तत्वों का भी भंडाफोड़ करेगी। सेवानिवृत्त बुजुर्गों को बनाया निशाना, सरकारी ढिलाई पर पीड़ितों में भारी आक्रोश। ठगों का यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। एसईसीएल की कोयला खदानों से 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को गाढ़ी कमाई के रूप में मिली एकमुश्त रकम को इन जालसाजों ने अपना शिकार बनाया। उन्हें शेयर बाजार में निवेश पर कई गुना रिटर्न देने का झांसा देकर खून-पसीने की कमाई ठग ली गई। 19 मई को करकटी निवासी म्रगनयन सिंह द्वारा दी गई शिकायत के बाद 13 जून को बुढ़ार थाने में एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन स्थानीय स्तर पर हुई लीपापोती और सुस्त कार्रवाई ने प्रशासन की मंशा पर सवाल दाग दिए हैं। जिन बुजुर्गों को बुढ़ापे का सहारा चाहिए था, वे आज न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। स्थानीय जनता और पीड़ितों में इस बात को लेकर तीव्र आक्रोश है कि आखिर इतने बड़े फर्जीवाड़े के बावजूद स्थानीय पुलिस-प्रशासन सोता क्यों रहा? अब देखना यह होगा कि सीआईडी की जबलपुर ब्रांच इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से शिकंजा कसती है और पीड़ितों को उनकी डूबी हुई रकम वापस दिला पाती है या नहीं।
