चिकित्सा का अद्भुत करिश्मा डॉ.अमोल पांडे की टीम ने दिया नया जीवन, प्रशासन व स्वास्थ्य तंत्र की नीतियों का दिखा जमीनी असर
Junaid Khan - शहडोल। संभाग मुख्यालय स्थित श्रीराम स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा विज्ञान का एक ऐसा अनूठा और अद्भुत करिश्मा देखने को मिला है, जिसने न केवल एक मरीज की जिंदगी संवार दी बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया स्वर्णिम अध्याय भी जोड़ दिया है। संस्थान के वरिष्ठ अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ डॉ. अमोल प्रभाकर पांडे एवं उनकी दक्ष विशेषज्ञों की टीम ने कोहनी की एक बेहद जटिल, भयावह और अत्यंत दुर्लभ चोट का सफल ऑपरेशन कर मरीज को स्थायी अपंगता और अपाहिज होने के मुहाने से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इस अकल्पनीय सफलता के बाद मरीज व उनके परिजनों ने डॉ. अमोल पांडे, उनकी पूरी मेडिकल टीम, अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ राज्य सरकार, जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की दूरदर्शी स्वास्थ्य नीतियों व बेहतर चिकित्सा व्यवस्थाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उनका सहृदय धन्यवाद ज्ञापित किया है। मरीज का कहना है कि चिकित्सकों का समर्पण और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं किसी वरदान से कम नहीं हैं। चिकित्सा जगत की भाषा में इस बेहद संकटपूर्ण स्थिति को कोहनी की ‘भयानक तिहरी चोट’ (Terrible Triad of Elbow) के नाम से जाना जाता है। इसमें कोहनी के जोड़ के डिस्कनेक्ट होने के साथ-साथ उसकी दो मुख्य हड्डियां और स्नायुबंधन (लिगामेंट) पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो जाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, केवल कोहनी का अपने स्थान से उतरना प्रति एक लाख आबादी में 5 से 6 लोगों में ही देखा जाता है, लेकिन जब कोहनी उतरने के साथ मुख्य त्रिकोणीय अस्थि और सहायक अस्थि का सिरा भी टूट जाए, तो ऐसे दुर्लभ मामले प्रति 10 लाख की आबादी में बमुश्किल एक या दो ही सामने आते हैं। इस बेहद नाजुक व चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में केवल हड्डियों को आपस में जोड़ना ही काफी नहीं था, बल्कि हाथ की पूरी कार्यप्रणाली और गतिशीलता को पुनजीवित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। डॉ. अमोल पांडे ने अपनी असाधारण तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए इस कठिन शल्य क्रिया में तीन जटिल प्रक्रियाओं को एक साथ अंजाम दिया। उन्होंने क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर वहां सटीक माप का कृत्रिम ढांचा स्थापित किया और अंदरूनी अस्थि खंड को विशेष तकनीकों के सहारे मजबूती से पुन: स्थिर किया। इसके साथ ही, अलनार कोलेटरल लिगामेंट के पूरी तरह फट जाने के कारण मरीज के ही शरीर के अन्य कण्डरा (टेंडन) का टुकड़ा लेकर नया स्नायुबंधन तैयार किया गया। यह वही सुप्रसिद्ध शल्य तकनीक है, जिसकी शुरुआत अमेरिका के महान बेसबॉल खिलाड़ी के इलाज से हुई थी और आज यह दुनिया भर में जोड़ों के पुनर्निर्माण का स्वर्ण मानक मानी जाती है।
इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता पर जिले के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों तथा क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों ने भी डॉ. अमोल पांडे और उनकी पूरी टीम को बधाई दी है। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि सरकार और प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को प्रोत्साहित करने और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बनाने के लिए जो निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, यह सफलता उसी का प्रत्यक्ष परिणाम है। प्रशासन व शासन द्वारा बनाए गए बेहतर माहौल और स्वास्थ्य ढांचे के कारण ही आज क्षेत्र के प्रतिभावान डॉक्टर्स इस तरह के जटिलतम ऑपरेशन करने में सक्षम हो पा रहे हैं। इस सफलता से विंध्य व आसपास के अंचल के निवासियों को यह स्पष्ट और भरोसा जगाने वाला संदेश मिला है कि अब कोहनी व जोड़ों की बड़ी से बड़ी और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए मेट्रो शहरों या बड़े महानगरों की ओर भागने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है; विश्वस्तरीय चिकित्सा विशेषज्ञता और अत्याधुनिक तकनीक अब अपने ही स्थानीय स्तर पर पूरी तरह सुलभ है।
