अतिक्रमण पर दोहरा रवैया? ठेका श्रमिक ने उठाए ATPS सिविल विभाग की कार्रवाई पर सवाल

चचाई बाजार में MPPGCL की जमीन पर कथित पक्के निर्माणों की जांच की मांग

करीब 20 साल से अस्थायी दुकान चलाने वाले श्रमिक का आरोप,कार्रवाई मेरे छोटे शेड पर,बड़े निर्माणों पर खामोशी क्यों?

खसरा 1595/1/1 समेत कई स्थानों के सीमांकन और स्वतंत्र जांच की मांग, ATPS-MPPGCL से तथ्यात्मक जवाब की अपेक्षा


Junaid Khan - शहडोल। चचाई अमरकंटक ताप विद्युत गृह (ATPS), चचाई में भूमि अतिक्रमण को लेकर एक ठेका श्रमिक द्वारा की गई शिकायत ने स्थानीय स्तर पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता करीम खान ने कार्यपालक निदेशक (उत्पादन) को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि चचाई बाजार में MPPGCL की भूमि पर कथित रूप से कई पक्के निर्माण किए गए हैं, लेकिन कार्रवाई का दबाव मुख्य रूप से उसके अस्थायी शेड पर बनाया जा रहा है। करीम खान के अनुसार वह करीब 20 वर्षों से अस्थायी रूप से साइकिल पंचर आदि का काम कर परिवार का भरण-पोषण करता है। उसका कहना है कि वर्तमान में उसने केवल चार लोहे के खंभों पर टिन का अस्थायी शेड लगाया है और कोई पक्का निर्माण नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि वह भविष्य में कोई स्थायी निर्माण नहीं करेगा। शिकायत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आवेदक ने केवल अपने विरुद्ध कार्रवाई रोकने की मांग नहीं की है, बल्कि चचाई बाजार में पिछले कुछ समय में हुए सभी कथित अतिक्रमणों और पक्के निर्माणों की समान रूप से जांच कराने की मांग की है।

कई निर्माणों पर उठाए सवाल

शिकायत में एक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से MPPGCL की भूमि पर अलग-अलग स्थानों पर पक्के निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में मोबाइल दुकान, नए पक्के निर्माण, बाजार क्षेत्र में हाल में बने भवनों तथा ऑफिसर क्लब के सामने चल रहे निर्माण का उल्लेख करते हुए इनके भूमि स्वामित्व और विभागीय अनुमति की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि संबंधित निर्माण कंपनी की भूमि पर हैं, तो निर्माण के दौरान सिविल विभाग द्वारा उन्हें रोकने, नोटिस जारी करने या नियमानुसार कार्रवाई करने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई। वहीं, यदि भूमि निजी है तो उसके स्वामित्व संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किए जाने की मांग की गई है। आवेदन में एक कथित मौखिक बिक्री का भी उल्लेख है, जिसमें अतिक्रमित भूमि पर बने निर्माण को लाखों रुपये में दूसरे व्यक्ति को दिए जाने की चर्चा होने का दावा किया गया है। इस आरोप की भी शिकायतकर्ता ने दस्तावेज एवं स्थल निरीक्षण के माध्यम से जांच कराने की मांग की है।

खसरा 1595/1/1 और ऑफिसर क्लब के सामने निर्माण पर भी सवाल

शिकायत में खसरा क्रमांक 1595/1/1 पर कथित दो मंजिला निर्माण का उल्लेख करते हुए भूमि के वास्तविक स्वामित्व की जांच की मांग की गई है। इसी तरह ऑफिसर क्लब के सामने कथित निर्माण को लेकर भी शिकायतकर्ता ने MPPGCL के भूमि अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि ये भूमि MPPGCL की हैं तो निर्माण रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि भूमि कंपनी की नहीं है तो उसका वास्तविक स्वामित्व स्पष्ट किया जाना चाहिए।

मजदूर का आरोप,मेरे साथ ही कार्रवाई क्यों?

करीम खान ने अपने आवेदन में स्वयं को कमजोर आर्थिक स्थिति वाला ठेका श्रमिक बताते हुए आरोप लगाया है कि उसके छोटे अस्थायी व्यवसाय को हटाने के लिए विभागीय दबाव बनाया जा रहा है। उसने आरोप लगाया कि दूसरी ओर बड़े एवं स्थायी निर्माणों के मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन सभी आरोपों की वास्तविकता भूमि रिकॉर्ड, सीमांकन, निर्माण अनुमति, विभागीय नोटिस तथा मौके के निरीक्षण से ही स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में पूरे मामले में ATPS-MPPGCL चचाई का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रबंधन से यह स्पष्ट किए जाने की अपेक्षा है कि शिकायत में बताए गए प्रत्येक निर्माण की भूमि स्थिति क्या है, किन निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है और शिकायतकर्ता के विरुद्ध कार्रवाई का आधार क्या है।। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं तो विभाग संबंधित अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर सकता है। वहीं यदि कंपनी की भूमि पर अनधिकृत निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार की गई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक किए जाने से स्थिति साफ हो सकती है। फिलहाल मामला एक ऐसे ठेका श्रमिक की शिकायत के रूप में सामने आया है, जो अपने छोटे अस्थायी व्यवसाय को लेकर कार्रवाई का सामना करने का दावा कर रहा है और साथ ही यह सवाल उठा रहा है कि यदि MPPGCL की भूमि पर अतिक्रमण नियम विरुद्ध है, तो जांच और कार्रवाई सभी मामलों में समान रूप से क्यों नहीं होनी चाहिए? शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच स्वतंत्र अथवा अन्य सक्षम विभाग के अधिकारियों से कराने की मांग की है। अब निगाह ATPS-MPPGCL चचाई प्रबंधन की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया पर है।

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