आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण पर मौन बैठा प्रशासन, श्रम कानूनों की उड़ रही धज्जियां

महीनों से बकाया मानदेय और अनधिकृत कटौती से आर्थिक तंगी झेल रहे कर्मचारी, संघ ने खोला मोर्चा


Junaid Khan - शहडोल। जिले के शासकीय विभागों, अस्पतालों, निगमों और शैक्षणिक संस्थानों में सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों का श्रम कानूनों के तहत खुलकर शोषण किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों की साठगांठ और प्रशासनिक अनदेखी के कारण ठेकेदारी प्रथा के तहत काम कर रहे सैकड़ों युवाओं को महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। स्थिति यह है कि कुशल और उच्च कुशल कार्य करने वाले कर्मचारियों को अभिलेखों में अकुशल दिखाकर उनके वेतन में भारी कटौती की जा रही है। न तो कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं और ना ही वेतन पर्ची (Wage Slip) उपलब्ध कराई जा रही है। सामाजिक सुरक्षा के नाम पर EPF और ESIC की राशि में भी भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे कर्मचारी और उनके परिवार पाई-पाई को मोहताज हो गए हैं। कर्मचारियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए 'मध्य प्रदेश राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ' ने अब सीधे प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ के जिलाध्यक्ष श्रेयांश कुमार मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष आशीष सिंह सिसौदिया एवं संभाग प्रभारी आर. के. साहू के नेतृत्व में श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के नाम सहायक श्रमायुक्त कार्यालय शहडोल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है। संघ ने मांग की है कि सभी शासकीय संस्थानों में आउटसोर्स कर्मचारियों को उनके कार्य के अनुसार न्यूनतम देय वेतन, हर माह की 7 तारीख तक नियमित भुगतान, वैधानिक बोनस और ईपीएफ-ईएसआई की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा, वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के नौकरी से निकालने की मनमानी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। प्रशासनिक स्तर पर इस गंभीर मुद्दे पर बरती जा रही ढिलाई को लेकर संघ ने सख्त रुख अपनाया है। ज्ञापन के माध्यम से संघ ने श्रम विभाग और संबंधित जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को चेताया है कि यदि 09 अक्टूबर 2026 तक बकाया वेतन का भुगतान, अनधिकृत कटौतियों की जांच और दोषी आउटसोर्स एजेंसियों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन प्रदेश स्तर पर ले जाया जाएगा। संघ के पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो राज्य कार्यकारिणी के माध्यम से भोपाल स्तर पर शासन और श्रम विभाग के समक्ष उग्र कदम उठाए जाएंगे। अब देखना यह होगा कि सो रहा श्रम विभाग और जिला प्रशासन इन लाचार कर्मचारियों की सुध लेता है या ठेकेदारों की मनमानी को यूं ही संरक्षण देता रहता है।

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