भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता देने पर बनी सहमति,प्रबंधन और एसईसीएल अधिकारियों से हुई वार्ता
Junaid Khan - शहडोल। रामपुर बटुरा खांडा एसईसीएल के रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में ओबी एवं अन्य कार्यों में लगी जय अम्बे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों ने रविवार को मोर्चा खोलते हुए कंपनी परिसर का घेराव किया। ग्रामीणों के आंदोलन के चलते करीब चार घंटे तक कंपनी का काम प्रभावित रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीण, बेरोजगार युवा और क्षेत्रीय लोग मौके पर मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता नहीं दिए जाने तथा कथित रूप से नेताओं से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दिए जाने का आरोप लगाते हुए कंपनी प्रबंधन के सामने अपनी नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना था कि रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में क्षेत्र के गांवों की जमीन और संसाधनों का उपयोग हो रहा है, ऐसे में परियोजना में निकलने वाले रोजगार के अवसरों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी की भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय बेरोजगार युवाओं की अपेक्षा बाहरी लोगों अथवा नेताओं से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जा रही थी। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों में लगातार असंतोष बढ़ रहा था। आंदोलन के दौरान प्रकाश चंद्रा, खांडा के सूरज तिवारी, रामपुर सहित आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी प्रबंधन के समक्ष अपनी मांग रखते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और क्षेत्र के पात्र बेरोजगार युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार का अवसर मिलना चाहिए।
चार घंटे तक प्रभावित रहा काम
ग्रामीणों के कंपनी परिसर के घेराव के कारण करीब चार घंटे तक काम बंद रहा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक भर्ती प्रक्रिया को लेकर कंपनी प्रबंधन की ओर से संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। स्थिति को देखते हुए कंपनी प्रबंधन एवं एसईसीएल के अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत शुरू की। मौके पर एसईसीएल मैनेजर अर्जुन जोड़े भी मौजूद रहे। इसके अलावा कंपनी की ओर से HR आलोक त्रिपाठी एवं HR रजनीश मिश्रा ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुना।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर हुई चर्चा
वार्ता के दौरान ग्रामीणों ने सबसे प्रमुख मुद्दा कंपनी में होने वाली भर्ती को बताया। ग्रामीणों का कहना था कि स्थानीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में हैं, लेकिन उन्हें भर्ती प्रक्रिया में अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन से मांग की कि भर्ती के लिए स्पष्ट प्रक्रिया बनाई जाए और स्थानीय पात्र युवाओं को प्राथमिकता दी जाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में नेताओं से जुड़े लोगों को प्राथमिकता देकर भर्ती किए जाने की बात सामने आई है। इस पर कंपनी के HR रजनीश मिश्रा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जिन लोगों की भर्ती की गई थी, उनमें से कुछ को कंपनी की ओर से फोन कर मौके पर बुलाया गया था, लेकिन वे मौके पर नहीं पहुंचे।
HR रजनीश मिश्रा ने दिया कंपनी का पक्ष
वार्ता के दौरान HR रजनीश मिश्रा ने ग्रामीणों के सामने कंपनी का पक्ष रखते हुए कहा कि जिन क्षेत्रीय नेताओं के आदमियों को भारती के लोगों को भर्ती किया गया था, उन्हें कंपनी की ओर से फोन लगाया गया था। उन्होंने बताया कि कंपनी द्वारा संबंधित लोगों को मौके पर बुलाया गया, लेकिन वे मौके पर उपस्थित नहीं हुए। कंपनी के इस पक्ष के बाद ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच भर्ती प्रक्रिया को लेकर आगे की व्यवस्था पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने कहा कि भविष्य में भर्ती प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को समान अवसर मिले और किसी भी प्रकार की सिफारिश या प्रभाव के आधार पर प्राथमिकता न दी जाए।
अधिकारियों की मौजूदगी में बनी सहमति
लगभग चार घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद कंपनी प्रबंधन, एसईसीएल अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बातचीत हुई। बातचीत में ग्रामीणों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाने का प्रयास किया गया। प्रबंधन की ओर से स्थानीय स्तर पर पात्र लोगों को भर्ती प्रक्रिया में अवसर देने को लेकर चर्चा की गई। ग्रामीणों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के रोजगार के अधिकार को लेकर है। उनका कहना है कि रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट से प्रभावित एवं आसपास के गांवों के युवाओं को रोजगार में उचित अवसर मिलना चाहिए।
स्थानीय युवाओं को रोजगार की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि परियोजना क्षेत्र में रामपुर, खांडा सहित आसपास के कई गांव सीधे तौर पर परियोजना की गतिविधियों से प्रभावित हैं। ऐसे में कंपनी में निकलने वाले रोजगार के अवसरों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। आंदोलनकारियों का कहना था कि यदि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी रहती है और स्थानीय पात्र युवाओं को योग्यता के आधार पर मौका मिलता है तो ग्रामीणों को कंपनी के कामकाज में सहयोग करने में कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन यदि भर्ती में पक्षपात या राजनीतिक सिफारिश को प्राथमिकता दी गई तो ग्रामीण दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
प्रबंधन ने सुनी ग्रामीणों की बात
वार्ता के दौरान HR आलोक त्रिपाठी और HR रजनीश मिश्रा ने ग्रामीणों की समस्याओं और मांगों को सुना। एसईसीएल मैनेजर अर्जुन जोड़े की मौजूदगी में हुई चर्चा में कंपनी और ग्रामीणों के बीच विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया गया। ग्रामीणों ने प्रबंधन से यह भी मांग की कि भविष्य में जब भी कंपनी में नई भर्ती हो तो उसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर सार्वजनिक की जाए, ताकि बेरोजगार युवक अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन कर सकें। इससे भर्ती प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना कम होगी।
आंदोलन के बाद काम हुआ शुरू
अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच हुई बातचीत तथा भर्ती प्रक्रिया को लेकर बनी सहमति के बाद आंदोलन समाप्त हुआ और कंपनी का काम पुनः शुरू हो गया। हालांकि ग्रामीणों ने साफ किया कि वे भर्ती प्रक्रिया पर नजर रखेंगे और यदि भविष्य में स्थानीय युवाओं की अनदेखी की गई तो वे फिर से कंपनी प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन कर सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिलाना है। उन्होंने कंपनी प्रबंधन से अपेक्षा जताई कि भविष्य में स्थानीय लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाएगी। रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में रोजगार का मुद्दा पिछले कुछ समय से ग्रामीणों के बीच लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। रविवार को हुए इस आंदोलन ने एक बार फिर स्थानीय रोजगार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों को सामने ला दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि वार्ता में बनी सहमति के अनुसार कंपनी प्रबंधन आगे की भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं को कितना अवसर देता है।

